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आखिर विभागीय अधिकारियों ने कृषि केंद्रों मे दी दबिश !

▶️ सिर्फ दिखावे के लिए किया गया कार्यवाही

▶️ कृषि संचालक के गोदामों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं अधिकारी

▶️ जिन कंपनी का पीसी लाइसेंस पर लगा हुआ है उसी कंपनी का दुकान पर मिल रहा है सामग्री

▶️ विभिन्न कंपनियों का खाद बीज एवं कीटनाशक दवाइयां गोदामों पर रखा जाता है

बाजार अतरिया ! DNnews-स्थानीय बाजार अतरिया में खेती किसानी के दिनों में लगातार कृषि केंद्र के द्वारा अनियमितता बरती जा रही है वहीं कृषि केंद्र में महंगे दामों पर कीटनाशक दवाई एवं बीज बेचे जा रहे हैं साथ ही लायसेंस में कंपनी के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट के जुड़े बिना ही विभिन्न कंपनियों के दवाई एवं बीज बेचे जा रहे थे. जिसको लेकर DNnews ने प्रमुखता से खबर लगाया गया था. खबर लगते ही खैरागढ़ कृषि विभाग के द्वारा निरीक्षण दल एलबी जैन एसडीओ के निर्देशन पर जांच करने पहुंचा था. हालांकि कुछ कृषि केंद्रों में ही सिर्फ पहुंच पाया लेकिन अभी अधिकांश विभिन्न कृषि केंद्रो में जांच प्रक्रिया करना बाकी है. अब देखना यह होगा कि क्या कार्यवाही होती है. कार्यवाही होगी या सिर्फ कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जाएगीये वक्त ही बताएगा. बता दें कि लगातार कृषि केंद्रों मे ग्राहकों को उधार पर खाद बीज एवं कीटनाशक दवाइयां दी जाती है. जिसके एवज में ब्याज ना लगाकर मनमाने तरीके से अधिक दामों पर खाद बीज एवं दवाइयां बेची जा रही है. जिसको लेकर लगातार कृषकों में खेती किसानी का कीमत का बोझ बढ़ता जा रहा है. जिससे किसान बोझ तले दब रहा है.

प्रमुखता से खबर लगने के बावजूद राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्यवाही का नहीं किया जाना समझ से परे है. कृषि केंद्र के व्यापारियों द्वारा लगातार राजनीतिक से जुड़े होने की वजह से राजनीतिक दबाव के चलते उच्च अधिकारियों द्वारा कार्यवाही नहीं की जा रही है. जिसके चलते बेखौफ होकर कृषि केंद्र के संचालन करने वाले लोगों के ऊपर कार्यवाही नहीं की जा रही है.

▶️सत्ता सरकार की छवि हो रही खराब

अगर कार्रवाई की भी जा रही है तो सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है. कार्यवाही करने के नाम पर सिर्फ अधिकारी कर्मचारी कृषि केंद्र के संचालकों द्वारा साठगांठ कर खानापूर्ति कर निकल जाते हैं जिसके चलते कृषि केंद्र के संचालक के हौसले बुलंद दिखाई दे रहे हैं. अब देखना होगा कि क्या इन लोगों के ऊपर सिर्फ कार्रवाई होती है भी कि नहीं और अगर कार्रवाई होती है तो किस हद तक कार्रवाई की जाती है. हालांकि मामले को लेकर लगातार उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई है बावजूद फोन का रिसीव नहीं करने की वजह से उनका पक्ष नही रखा जा सका ।

▶️कृषकों को उधार देने के नाम पर अधिक कीमत में बेचे जा रहे हैं सामग्री

कृषि केंद्र के प्रतिष्ठानों के द्वारा लगातार उधार देने की वजह से कृषकों को मनमाने तरीके से महंगे दामों में सामग्री बेची जा रही है. बता दें कि लगातार कृषकों को अधिक कीमतों पर खाद बीज एवं दवाइयां दी जा रही है जिसके ऊपर संबंधित अधिकारियों द्वारा लगाम नहीं लगा पा रही है. हालांकि विभाग के द्वारा दुकान के बाहर सूचना पटल पर सामाग्री एवं कीमत की लिस्ट लगाई जानी है. लेकिन किसी भी दुकान के सामने यह नजर नहीं आ रहा है. खास बात यह है कि कृषकों को आए खेती किसानी के दिनों में पैसे की किल्लत के चलते लोगों को कृषि केंद्रों से उधारी में खाद बीज एवं कीटनाशक दवाइयां खरीदने मजबूर हो रहे हैं जिसके चलते महंगे दामों में कृषकों को सामग्री थमा दी जा रही है. जिसके चलते कृषक बोझ तले दब रहे हैं और आर्थिक स्थिति खराब हो रही है.

▶️कृषि केंद्रों के गोदामों में नहीं पहुंच पा रहे हैं अधिकारी कर्मचारी

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अगर जांच करने अधिकारी कर्मचारी पहुंच भी रहे हैं तो वह गोदाम तक नहीं पहुंच पा रहे हैं कृषि केंद्र के संचालक इतने चालाक हो गए हैं कि जिन कंपनी के पीसी लाइसेंस में जुड़ा हुआ है वहीं सामग्री ही कृषि केंद्र में दिखावे के लिए रखे है. अगर अधिकारी अगर जांच करते हैं तो सिर्फ जिन पीसी लाइसेंस में जुड़ा हुआ है उन्हीं कंपनी का सामग्री कृषि संचालन करने वाले दुकानों पर मौजूद है बाकी अन्य विभिन्न प्रकार के कंपनियों के दवाई उनके गोदामों में पड़ा हुआ है. जो ग्राहक आने पर ही स्थिति को देखकर चोरी-छिपे दी जा रही है. मतलब यह है कि अधिकारी कर्मचारी गोदामों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं वही गोदामों की जानकारी भी विभाग को नहीं दी जा रही है वहीं दुकान में कितनी सामग्री कितनी संख्या में मौजूद हैं उनकी भी पटल पर जानकारी नहीं है।

राजनितिक संरक्षण के चलते नहीं की जा रही है कार्यवाही

लगातार कृषि संचालकों के द्वारा कहीं ना कहीं राजनीति में जुड़े हुए होने की वजह से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हुआ है. लगातार कार्यवाही को लेकर सवाल खड़ा हो रहा है लेकिन राजनीतिक संरक्षण के चलते इन कृषि केंद्रों के ऊपर कार्यवाही नहीं किया जाता है हालांकि कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है अगर कोई सवाल खड़ा किया जाए तो उनको दबा दिया जाता है क्योंकि उनका हौसला बुलंद है राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हुआ है जिसके चलते निचले स्तर के लोगों को दबा दिया जाता है ऐसे में राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्यवाही का नहीं किया जाना सवाल खड़ा कर रहा है जो समझ से परे है। एक बात तो स्पष्ट है कि या तो संबंधित विभाग मिले हुए है या नही तो कार्यवाही करने से डरते है.

“निरीक्षण दल आया था निरीक्षण किया गया है नमूना भी लिया गया है. जांच कार्यवाही भी किया गया है एक प्रकाश कृषि केंद्र में बंदिश भी दिया गया है आगे लगातार कार्यवाही की जाएगी।”

एलबी जैन एसडीओ कृषि विभाग खैरागढ़

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