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किसान महासभा राजनांदगांव द्वारा बफरा मे किसान संसद का आयोजन किया गया !

DNnews ब्यूरो !

खैरागढ़ ! DNnews-छत्तीसगढ़ किसान महासभा राजनांदगांव द्वारा 8 अगस्त को सामुदायिक भवन,ग्राम पंचायत बफरा मे किसान संसद का आयोजन किया गया.संसद मे सभापति सुरेश चतुर्वेदी एवं उपसभापति भुनेश्वर साहू थे. संसद की शुरुआत देश में चल रहे किसान आंदोलन में शहीद किसानों एवं कोविड महामारी के दौरान मारे गए लोगों को एक मिनट का मौन धारण कर श्रद्धाजंलि दी. तथा मोदी सरकार की किसान मजदूर नीतियों की भ्रत्सना की गई. संसद में तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने तथा तमाम फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की कानूनी गांरटी करने का प्रस्ताव यादराम साहू ने प्रस्तुत किया. संसद में प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया.

संसद को ऐक्टू के राज्य महासचिव बृजेन्द्र तिवारी, राजनांदगांव जिला पंचायत सदस्य विप्लव साहू,एस. आर.वर्मा, संतराम वर्मा, भोजदास साहू, थानसिंह वर्मा,घनश्याम साहू, हमलेश चंदेल, राजेश कुमार टंडन, पलटूराम बघेल, कोमेश साहू आदि ने अपनी बात रखी.

संसद में कहा गया कि मोदी सरकार द्वारा कोरोना काल मे लाए गए किसान विरोधी काला कानूनों की वापसी एवं एम एस पी पर फसलों की खरीद को कानूनी दर्जा देने के छिड़ा संयुक्त किसान आंदोलन तमाम बाधाओं, दमन को झेलते हुए साढ़े आठ महीने पूरा कर चुका है.मोदी सरकार की जिद से आंदोलन लम्बा होता हुआ दिख रहा है. इसलिए किसानों की एकजुटता कर मुकाबला किया जा सकता है. संसद में जानलेवा मंहगाई और बेरोजगारी को लेकर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए रोष प्रगट किया गया. रासायनिक खाद की कमी का मुद्दा उठाया गया.फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से घाटे का सामना करना पड़ रहा है. स्वास्थ्य सुविधाओं एवं शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त समस्याओं पर भी चर्चा की गई.संसद में नैनसिंह साहू, ओंकार ठाकुर, श्याम दास साहू, तारनदास साहू, धनेश्वर साहू, प्रहलाद राम साहू, जयप्रकाश वर्मा, धनसू राम साहू, विजय लहरे,आदि साथियों ने हिस्सा लिया.संसद में कम्पनी राज और कारपोरेट लूट के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया गया.

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