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खैरागढ़ वन विभाग परिसर में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस !

Sanju mahajan khairagarh.

खैरागढ़ ! DNnews – वन विभाग परिसर में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया गया। जहां वन विभाग के पदाधिकारी व कर्मी मौजूद रहे। खैरागढ़ वन विभाग के वनमंडलाधिकारी संजय यादव ने बताया कि जीवों में विभिन्न प्रकार के जीवों को ही जैव विविधता कहा जाता है। वन में जीव जंतु कैसे रहते हैं। उनकी कैसे सुरक्षा होती है। जीव जंतु किस तापमान में रहते हैं। उनकी जीवन शैली क्या है, आदि के बारे मे वन विभाग परिसर में उपस्थित लोगों को बताया गया।

▶️जैव विविधता दिवस का इतिहास

प्राकृतिक एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में जैव विविधता का महत्व को देखते हुए जैव विविधता दिवस को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मानने का निर्णय लिया गया। यह हर साल 22 मई को दुनियाभर में एक साथ मनाया जाता है। इसे सबसे पहले सन 1922 ( 29 दिसंबर ) को संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में मनाया गया था किंतु कई देशों द्वारा व्यावहारिक कठिनाइयां जाहिर करने के कारण इस दिन को 29 दिसंबर की बजाय 22 मई को मनाने का निर्णय लिया गया। विश्व के समृद्धतम जैव विविधता वाले 17 देशों में भारत भी सम्मिलित है, जिनमें विश्व की लगभग 70 प्रतिशत जैव विविधता विद्यमान है। विश्व के कुल 25 जैव विविधता के सक्रिय केंद्रों में से दो क्षेत्र पूर्वी हिमालय और पश्चिमी घाट भारत में है। जिस सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था इसके बाद साल 2001 से यह हर साल 22 मई को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को जैव विविधता के प्रति जागरूक करना है। इस साल का थीम We’re part of the solution ForNature है। वर्तमान समय में इसका महत्व बढ़ गया है। खासकर कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी के चलते लोगों का ध्यान पर्यावरण संरक्षण में पड़ा है। हमारे जीवन में जैव-विविधता का काफी महत्व है। हमें एक ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है, जो जैव- विविधता में समृद्ध, टिकाऊ और आर्थिक गतिविधियों के लिए हमें अवसर प्रदान कर सकें। जैव-विविधता के कमी होने से प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, सूखा और तूफान ,पर्यावरण ग्लोबल वॉर्मिंग आदि का खतरा और अधिक बढ़ जाता है, जिसके चलते हमारे लिए जैव-विविधता का संरक्षण बहुत जरूरी है।

▶️जैव विविधता दिवस का उद्देश

लाखों विशिष्ट जैविक की कई प्रजातियों के रूप में पृथ्वी पर जीव उपस्थित है और हमारा जीवन प्रकृति का अनुपम उपहार है। इसमें विशेष तौर पर वनों की सुरक्षा, संस्कृति, जीवन के कला शिल्प, संगीत, वस्त्र-भोजन, औषधीय पौधों का महत्व आदि को प्रदर्शित करके जैव-विविधता के महत्व एवं उसके न होने पर होने वाले खतरों के बारे में जागरूक करना है।

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