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खैरागढ़ म लकर धकर……………राजनीति सुख

इंहा तो राजनीति के बड़ माड़ा हे,
कुछू नई आए तभो समरथक गाड़ा-गाड़ा हे !

जितेंद्र ल देखके चाचा रो पड़ीस,आंसू घलोक छलक गे,
जुग जुग जिये के आशीर्वाद म जितेंद्र घलो गदक गे !

आगे बढ़ना हे त बड़े मन के पाछू धर,
फेर देख गाड़ी कइसे दउंड़ही फर फर !

इंहा तो दू फूट म दिखत हे कांग्रेस,
बड़े नेता मन ल कईसे करव इंप्रेस !

बाहिरे बाहिर घुमत रिहीस नवाज के साथी मन,
बने भीड़ जमा लिन जितेंद्र के हाथी मन !

गली गली घुमत रिहीस झंडा ल टांगके,
पेट्रोल डलवाए बर पइसा नइहे. त काम चलात मांग के !

बसपन के पियार धुन म, डीआई नाकुन म, फरफटी वाले मन आगू आगू चलत रिहिस,
ये डाहर भीड़ सकलाही कि नई सकलाही किके संगठन वाले मन बोटोर बोटोर देखत रिहिस !

आज भगवा रंग ल देखके थोकन हड़बड़ा गे रेहेंव,
थोकन तीर म जाथव किके बाजू वाले ल केहेंव !

देखथों त फलाना हरे, मोर बाजू म ओखर आदमी झंडा धरे !

खैरागढ़ म जितेंद्र तो अईस हे, फेर सिरतोन म उदय होईस कि नही,
ये बात ल बता पाही उही मन सही !

धिरे धिरे चुनाव लकठावत हे,
घर मे खुसरे नेता मन मटमटावत हे!

जेन कभू राजनीति नई करे हे तेनो ह किश्मत आजमावत हे,
रही रही के रद्दा रेगईया मन ल चाय पियावत हे!

एक डाहर पिका फुटते ही बनहूं काहत हे विधायक,
ओला तो आला कमान बताही हवे कि नईहे लाएक !

अतेक लकर धकर झन कर थोकन अगोर ले,
साथी मन संग चलके हाथ पाव ल जोर ले !

इही ल सिखबे तभे तो पतियाही,
कलम ल चलाए बर भरे ल परही सियाही !

राजनीति सुख भोगना हे त बड़े मन के पाछू पकड़,
आगू बढ़ना हे त छोड़े परही अकड़ !

◆ टीप – यह लेख केवल मनोरंजन के लिए है. साथी गण अन्यथा न ले !

✍️ दिनेश साहू मदनपुरिहा ( बाजार अतरिया ) खैरागढ़ राजनांदगांव (छग) 9098981250

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One Comment

  1. आप बड़ सुंदर कविता लिखो हो साहू जी आपके लिखे कविता ना पढ़कर बड़ आनंद आईस

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