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गंगा दशहरा पर तालाब खोदने और गाद निकालने की रही है प्राचीन परंपरा !

DNnews ब्यूरो !

▶️जेठ महीने की पंचमी तिथि को दानी तालाब की खुदाई की गई

▶️ तालाब केवल जल नहीं बल्कि संस्कृति का भी करते हैं संरक्षण

धमधा ! DNnews- छत्तीसगढ़ सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त श्री धनवेंद्र जायसवाल ने कहा कि धमधा में 126 तालाबों की यह परंपरा रही है। हम तालाबों को सहेजकर नहीं रख पाए, लेकिन जितने तालाब बच गए हैं, उनका संरक्षण आवश्यक है। इस दिशा में काम करना कठिन संकल्प है। तालाबों से केवल जल संरक्षण नहीं होता है, बल्कि परंपरा और संस्कृति का भी संरक्षण होता है। हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं, तालाबों के संरक्षण के जरिये हमारा उन ओर ध्यान जा रहा है, यह स्तुत्य और प्रणम्य प्रयास है। इससे दूसरे गांव के लोग भी प्रेरित होंगे। श्री जायसवाल धमधा के गोपाल तालाब काष्ठस्तंभ पुनर्स्थापना के स्मारिका विमोचन व पौधरोपण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे।

▶️ गोपाल तालाब में स्मारिका विमोचन व पौधरोपण का कार्यक्रम हुआ

इसके पूर्व अतिथियों ने धमधा के प्राचीन व ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया तथा पुरातात्विक धरोहरों के साथ की जा रही छेड़छाड़ पर चिंता जताई। मुख्य अतिथि श्री जायसवाल ने कहा कि कई तरह की अलग-अलग समितियां काम करती हैं, लेकिन अपने नगर के, क्षेत्र के गौरव का गान करने वाली समिति छत्तीसगढ़ में कम ही दिखाई देती है। अपने मातृभूमि, जन्मभूमि का गौरव का गान करना बहुत बड़ी भक्ति का भाव है। यह काम बहुत कम लोग कर पाते हैं, इसका महत्व भी कम लोग समझ पाते हैं। समिति ने 40 लोगों के आंशिक सहयोग और श्रमदान से इस कार्य को पूरा किया। संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के उपसंचालक डॉ. प्रतापचंद पारख ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ऐसे कई गांव हैं, जहां छै कोरी छै आगर तालाबों का जिक्र मिलता है। यह छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण की दिशा में किये गए सदियों से चली आ रही परंपरा को दर्शाता है।

पुरातत्व विभाग के पर्यवेक्षक श्री प्रभात सिंह ने कहा कि आज सुखद संयोग है कि गंगा अवतरण दिवस भी है और ऐसे समय में जल संवर्धन-काष्ठस्थापन जैसा महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है, यह अपने आप में सुंदर अवसर है। मैं धमधा के दानी तालाब का जिक्र करना चाहूंगा। दानी तालाब के बीच में जो स्तंभ है, उसमें एक ताम्रपत्र जड़ा है। उसकी सूचना धर्मधाम गौरवगाथा समिति के सदस्यों ने हमारे विभाग को दी। उसका छायाचित्र लेकर हमने लिपि और भाषा का जब हमने अध्ययन किया तो जो जानकारी सामने आई, वह जानकारी बहुत ही रूचिकर है। दानी तालाब के स्तंभ की स्थापना 1830 ईस्वी में हुई। तालाब के निर्माण के 59 साल बाद गाद निकाली गई, सफाई की गई, तब स्तंभ का भी जीर्णोद्दार किया गया। इसके 107 साल बाद फिर से जीर्णोद्धार किया गया। तालाब स्थापना और दो बार जीर्णोद्धार की तिथि उस ताम्रपत्र में अंकित है। खास बात यह है कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही तीनों कार्य हुए हैं। अब प्रश्न उठता है कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही तालाब की स्थापना और संस्कार क्यों किये गए होंगे। हम क्षेत्र कृषि प्रधान है। हमारे अंचल में मानसून 15 जून के बाद आता है, ज्येष्ठ शुक्ल की पंचमी तिथि यानी मानसून आगमन के पूर्व की तिथि है। यानी बारिश आने के पूर्व जल स्त्रोतों को साफ करने की परंपरा थी। यह ज्ञान परंपरा सदियों से चला आ रही है। दानी तालाब के ताम्रपत्र से इस परंपरा की पुष्टि होती है, जिसमें 1830 में ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी तिथि को तालाब का निर्माण होना अंकित है। इसके 48 वर्ष बाद पहली बार जीर्णोद्धार किया गया। फिर 59 साल फिर से बाद ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को इस तालाब का गहरीकरण का उल्लेख ताम्रपत्र में है। इन 107 साल में तीन बार तालाब के निर्माण और जीर्णोद्धार का कार्य हुआ, तीनों की तिथि एक ही है ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी। ताम्रपत्र में अंकित घटनाओं की तिथि से पूर्वजों के उस पारंपरिक ज्ञान का संदेश मिलता है, जिसमें वे मानसून आने के पूर्व अपने जलस्त्रोतों का संरक्षण किया करते थे, जिससे वन और कृषि संस्कृति को अक्षुण्य बनाया रखा जाता था। विशेष अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता गुप्ता एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कमलाकर भंडारकर ने तालाबों की परंपरा को पुर्नजीवित करने के प्रयास की सराहना की। स्वागत भाषण सामर्थ्य ताम्रकार ने दिया। समिति का प्रतिवेदन वाचन अशोक देवांगन ने किया। मंच संचालन वीरेंद्र देवांगन व आभार प्रदर्शन विकास राजपूत ने किया। इस मौके पर श्रवण गुप्ता, इंद्रसेन यादव, राजीव गुप्ता, रमेश पटेल, मुखराज किशोर यादव, अनिल मार्कंडेय, भुवनेश्वर धीवर, आनंद यादव, दुर्गेश देवांगन सहित नागरिक उपस्थित थे।

▶️धन्यधरा धमधा की, तू छत्तीसगढ का गौरव है

विशेष अतिथि श्री सिंह ने स्वरचित कविता “धन्यधरा धमधा, तू छत्तीसगढ़ का गौरव है” की प्रस्तुत दी। उन्होंने धमधा के पुरातत्व और गौरव का बखान इस गीत में किया है। साथ ही 10 साल की बच्ची मोक्षिता व भव्या शर्मा ने “सखी री मोहे लागे धमधागढ़ निको” की प्रस्तुति दी। इसमें धमधा के सभी ईष्ट देव और मंदिरों का सुंदर चित्रण किया गया है।

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