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दम तोड़ रही है छतीसगढ़ शासन के गोधन न्याय योजना, इधर लावारिश मवेशी सड़को पर, वही आज भी फसलों को चट कर रही है लावारिश मवेशी !

खैरागढ़ ! DNnews- छत्तीसगढ़ शासन के महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बारी से यही कयास लगाया जा रहा था कि जमीन लेबल पर सारा काम जनहित मे होगा. लेकिन प्राशासनिक कसावट के बाद भी यह योजना दम तोडते हुए दिखाई पड़ रही है. ब्लाक मे जुलाई 2020 मे पहले जिस स्तर पर गोधन न्याय योजना के तहत गौठानो मे समूह के माध्यम से गोबर खरीदी की जा रही थी. उस हिसाब से ऐसा कयास लगाया जा रहा था कि पशुपालक गोबर बेचकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर लेंगे. लेकिन शुरू के कुछ महिने तक तो गोबर की ताबड़तोड़ खरीदी हुई. खरीदी इतना हुआ कि गोबर रखने का जगह भी गौठानो मे नही मिला.

▶️ खाद बनाने के लिए टैंक बनना था अधिकांश जगहो पर नही बन पाया

बतादे कि गोबर से वर्मी खाद बनाने की विधि को अपनाते हुए अधिकांश गौठानो मे वर्मी टैंक व नाडेप टैंक बना हुआ है. स्थिति यह है कि अधिकांश जगहों पर यह वर्मी टैंक व नाडेप टैंक बनने से पहले ही दम तोडने लगा है. वहीं अधिकांश गौठानो के गोबर रखने के लिए पर्याप्त भी है. यही वजह है कि गोबर को टैंक मे डालने के बजाए बाहर रखा हुआ है. जिससे गोबर से खाद बनाने का योजना भी पुरी तरह से फैलवर साबित हो रही है.

▶️ रोका छेका भी पुरी तरह से फैल दिखाई पड़ता है.

सरकार रोका छेका अभियान को लेकर कितना भी अपनी पीठ थपथपा लें लेकिन आज भी सड़कों मे लावारिस मवेशियों को देखा जा सकता है. यही नही लावारिश मवेशी आज भी किसानों के फसलों को चट कर रहे है. जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अधिकांश पंचायतों सहित आश्रित ग्रामों मे गौठान का निर्माण हुआ है. वही कई गांवो मे जगह आभाव के कारण गौठान नही बन पाया है. लेकिन जहां गौठान बना है वहा आज भी गौठान खाली पड़ा हुआ है.

▶️मवेशियों के लिए न तो पानी की व्यवस्था और ना ही छाया की

जिस मवेशी को लोग गौमाता की दर्जा देकर पुजते है. आज वही गौमाता सड़को पर दर-दर भटक रही है. न तो मवेशी मालिक को मवेशी का चिंता है और ना ही प्रशासन का इस ओर ध्यान है. इत्तेफाक से यदि किसी गौठान मे दोचार मवेशी को ठहरा भी दिया तो न तो उसके लिए चारा पानी की व्यवस्था है और ना ही छाया की. बारिश मे किस स्थिति मे बेजुबान मवेशी खुले आसमान मे रहते है इसकी कल्पना खुद कर सकते है. पिछले साल तो अधिकांश गौठानो मे बारिश मे पशुओं की मरने की खबर आई थी.

▶️ पंद्रहवें वित्त की राशि से बना कांक्रीट वर्क

बतादें कि पंचायत मे जिस राशि को ग्राम के मुलभूत सुविधाओं के लिए लगाया जाना चाहिए था. आज वही अधिकांश ग्रामों मे पंद्रहवें वित्त की राशि को गौठान मे पानी टंकी , पंप, नाडेप टैंक, वर्मी टैंक, पेंटिंग आदि मे लगाया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक एक पंचायत मे पंद्रहवें वित्त की राशि लगभग दस लाख तक खर्च हो चुका है. जबकि वही राशि पंचायत के अन्य मुलभूत सुविधाओं के लिए लगाया गया होता तो विभिन्न समस्याएं गांव से दूर हो जाता . आज भी अधिकांश पंचायतों के ग्रामों मे गली मे कीचड़, पेयजल की समस्या सहित अनेकों समस्या बनी हुई है. इस पर प्रशासन का कोई ध्यान नही है. प्रशासन को चाहिए कि लाखो की लागत से गौठान को मोडिफाई किया है कम से कम उसका उपयोग सही तरीक़े से हो.

बतादे कि ब्लाक मे 40 गौठान निर्मित है जहां पांडुका , कुकुरमुड़ा, बफरा आदि ग्रामों मे गोबर की आवक नही होने के कारण खरीदी बंद है. वही सिंघौरी, मदनपुर, खपरी के अलावा और भी गांवो मे नाम मात्र की गोबर खरीदी हो रही है.

ब्लाक के सभी गौठानो मे गोबर खरीदी के निर्देश दिया गया है. रही सवाल लावारिश मवेशी का तो उसको गौठान समिती व ग्रामीणों के हिसाब से व्यवस्था किया जा रहा है.
रोशनी भगत टोप्पो सीईओ जनपद पंचायत खैरागढ़

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