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बांस ने भी तोड़ा नीलामी में राजस्व प्राप्ति का रिकार्ड,मुख्य वनसंरक्षक श्रीमती शालिनी रैना व वनमण्डलाधिकारी संजय यादव की बेहतर सूझबूझ से फारेस्ट कोष फिर हुवा मालामाल !

Dileep shukla salhewara.

▶️”हरा सोना” के नाम से पहचाने जाने वाले बांस का मानव जीवनकाल में विशिष्ट महत्व है

▶️जहां जन्म के समय बांस की कमचील, बाल्यावस्था में बांस से बनी सामग्री, झूला,बांसुरी आदि उपयोगी है वहीं अंतिम समय में बांस से ही शवशैया तैयार होती है व कपालक्रिया की जाती है

साल्हेवारा ! DNnews- राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ वनमंडल प्रदेश के बांस वनक्षेत्र की दृष्टि से बड़े वनमंडलों में से एक है। कार्य आयोजना के प्रावधानों के अनुसार वर्ष 2020-21 में वनमंडल के 17 बांस कूपों के 4585.245 हेक्टेयर क्षेत्र में संवेदनशील परिस्थितियों में खैरागढ़ वनमंडल के अमले द्वारा योजनाबद्ध ढंग से बांस विदोहन+परिवहन का कार्य समय पर संपादित किया गया. जिसके परिणामस्वरूप निर्धारित दर पर जहां व्यापारिक बांस का वितरण वनमंडल सहित अन्य वनमंडलों के परंपरागत बंसोड़ परिवारों को उनके रोजगार हेतु वितरण किया गया वहीं ग्रामीणों को उनकी निस्तारी आवश्यकता की पूर्ति हेतु भी बांस प्रदाय किया गया. गुणवत्ता से परिपूर्ण औद्योगिक बांस के विक्रय से इस वित्तीय वर्ष के द्वितीय नीलाम में रिकार्ड तोड़ राजस्व की प्राप्ति हुई।इसके पूर्व भी एक नीलामी में भी भरपूर राजस्व रिकार्ड राजस्व की प्राप्ति इसी सत्र में फारेस्ट कर चुका है।

20 जुलाई को अछोली काष्ठागार, डोंगरगढ़ में आयोजित नीलाम में औद्योगिक बांस की 22 लॉट एवं काष्ठ की 208 लॉट सहित कुल 230 लॉट विक्रय हेतु रखी गई। इन लॉटों में औद्योगिक बांस का अपसेट प्राईज़ 2,77,34,000 (दो करोड़ सतहत्तर लाख चौंतीस हजार) रूपये एवं काष्ठ 720.331 घनमीटर + 427 जलाऊ चट्टों का अपसेट प्राईज़ 1,80,24,500.00 (एक करोड़ अस्सी लाख चौबीस हजार पांच सौ) रूपये रखा गया था। नीलाम में कुल 59 क्रेताओं (ठेकेदारों) ने भाग लिया एवं कुल 165 लॉटों का विक्रय वन विभाग द्वारा इन क्रेताओं को किया गया। काष्ठ निर्धारित अवरोध मूल्य राशि रू.1,34,63,000
(एक करोड़ चौंतीस लाख तिरसठ हजार) से 37 प्रतिशत से अधिक दर पर राशि रू. 1,84,62,200 (एक करोड़ चौरासी लाख बासठ हजार दो सौ) रूपये में बिकी। नीलाम में रखे गये औद्योगिक बांस से अभूतपूर्व राजस्व की प्राप्ति हुई है.कुल 21 लॉटों के निर्धारित अवरोध मूल्य 2,77,05,500 (दो करोड़ सतत्तर लाख पांच हजार पांच सौ) से 77 प्रतिशत से भी अधिक मूल्य राशि रू. 4,91,00,200 (चार करोड़ इंक्यानबे लाख दो सौ) की प्राप्ति हुई,जो अपने आप में एक विशिष्ट उपलब्धि है।

ज्ञातव्य हो कि 7 जुलाई 2020 को हुए नीलाम में भी वनोपज (काष्ठ) के निर्धारित अवरोध मूल्य राशि रू. 3,00,51,000.00 (तीन करोड़ इक्यावन हजार) से 40 प्रतिशत अधिक दर पर बिकी, जिसका विक्रय मूल्य राशि रू. 4,21,47,920.00 (चार करोड़ इक्कीस लाख सैंतालीस हजार नौ सौ बीस) प्राप्त हुआ था.

इस प्रकार एक ही माह में खैरागढ़ वनमंडल अंतर्गत लगभग 11 करोड़ रूपये की राजस्व की प्राप्ति हुई है। कोविड-19 के संक्रमणकाल के दौरान भी लगातार रिकार्ड राजस्व की प्राप्ति होना सुखद समाचार है, क्योंकि शासकीय कोष में बढ़ोत्तरी जनहित के कार्यों को गति प्रदान में सहायक होती है। निश्चित तौर पर खैरागढ़ वनमंडल अंतर्गत पदस्थ वन अमले द्वारा जिस कुशलता एवं लगन से कार्य किया गया है, वह काबिले तारीफ व सराहनीय है।

इस कार्य में श्रीमती शालिनी रैना, भा.व.से. मुख्य वन संरक्षक दुर्ग वृत्त दुर्ग तथा संजय यादव, भा.व.से. वनमंडलाधिकारी, खैरागढ़ के कुशल मार्गदर्शन की विशेष भूमिका रही। साथ ही तीनों उपवनमंडलाधिकारियों, क्षेत्रीय परिक्षेत्र अधिकारियों, काष्ठागार अधिकारी एवं मैदानी अमले की सूझबूझ, समयबद्धता के साथ कार्य संपादन की शैली भी महत्वपूर्ण रही है।

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