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वन अधिकार अधिनियम के प्रति अधिकारियों एवं ग्रामवासियों में जागरूकता लाने की जरूरत – कलेक्टर

DNnews ब्यूरो !

▶️ग्रामीणजनों के जीवन स्तर में परिवर्तन लाने के लिए उनकी आजीविका की संभावना पर दें विशेष ध्यान

▶️वन अधिकार अधिनियम से अधिक से अधिक लाभान्वित हो ग्रामीणजन

▶️वन अधिकार अधिनियम, ग्रामीणजनों की आजीविका बढ़ाने एवं सामुदायिक अधिकार और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के संबंध में कार्यशाला का आयोजन

राजनांदगांव ! DNnews- कलेक्टर श्री तारन प्रकाश सिन्हा की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में वन अधिकार अधिनियम, ग्रामीणजनों की आजीविका बढ़ाने एवं सामुदायिक अधिकार और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कलेक्टर ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के बेहतर क्रियान्वयन किए जाने की जरूरत है। विशेषकर इस अधिनियम के प्रति अधिकारियों एवं ग्रामीणजनों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है। जहां सामुदायिक वनाधिकार पट्टे दिए जा रहे हैं उनका राजस्व रिकार्ड में भी अपडेट हो। यह जरूरी है कि वनाधिकार पट्टा एवं राजस्व रिकार्ड में साम्यता रहे। सामुदायिक वन अधिकार पत्र एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के संबंध में जागरूकता होनी चाहिए। ग्रामीणजनों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए उनकी आजीविका की संभावना पर विशेष ध्यान देना है। प्रबंधन समिति की भूमिका तथा वन को संरक्षित रखते हुए ग्रामीणजनों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में कार्य करना है। जमीनी स्तर पर उन्हें शासन की इन योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। शासन तथा स्वयं सेवी संगठन इस दिशा में समन्वित कार्य करें, तो ग्रामीणजन वन अधिकार अधिनियम से निश्चित ही अधिक से अधिक लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि जिले के अधिकारी वन अधिकार से संबंधित अन्य राज्यों में आजीविका के लिए हो रहे बेहतर कार्यों का अवलोकन जाकर करेंगे, तो उनकी भ्रांतियां दूर होगी। जिले में वन अधिकार अधिनियम को शासन की मंशा के अनुरूप ग्रामीणजनों के हित में आगे बढ़ाना है.

वनमंडलाधिकारी राजनांदगांव श्री एन गुरूनाथन ने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन के अंतर्गत ग्राम की पंरपरागत सीमाएं महत्वपूर्ण होती है और इसमें सरपंच एवं वनवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सामुदायिक वन संसाधन के क्षेत्र मोहला, मानपुर एवं खैरागढ़ विकासखंड में इस संबंध में जागरूकता लाने की जरूरत है। वनमंडलाधिकारी खैरागढ़ श्री संजय यादव ने कहा कि ग्रामवासियों को वन संसाधन अधिनियम की भावनाएं एवं जानकारी समझाने की आवश्कता है। उन्हें  इस अधिनियम से प्राप्त होने वाले लाभ की जानकारी देनी होगी.

जिला पंचायत सीईओ श्री लोकेश चंद्राकर ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के संबंध में जानकारी एवं जागरूकता राजस्व एवं वन विभाग तथा जनपद अधिकारियों तक जमीनी स्तर पर पहुंचना चाहिए। सामुदायिक वन संसाधन पत्र एवं सामुदायिक वन अधिकार पत्र के कैसे बनेगा एवं कैसे ग्रामवासी लाभान्वित होंगे और उनके जीवन में कैसे परिवर्तन लाया जा सकता है। इसके संबंध में कार्यशाला में सभी जनपद सीईओ अपनी जिज्ञासा से प्रश्र कर सकते हैं। अपने अधिकारों के अनुरूप जिला पंचायत अमला सक्रिय रूप से कार्य करेंगे।
इस अवसर पर  फांउडेशन फार ईकोलॉजिकल सिक्योरिटी (एफईएस) की प्रोग्राम मैनेजर सुश्री मंजीत कहा कि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन, सामुदायिक वन अधिकार पत्र तथा वन अधिकार पट्टा के अंतर्गत ग्रामीणजनों की आजीविका के लिए संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि कैसे यह अधिनियम अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और सामुदायिक सहभागिता बने, यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिले में पेसा ब्लॉक मानपुर, मोहला, अंबागढ़ चौकी में 185 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक वन अधिकार की संभावना है। जिले में लगभग 600 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक वन अधिकार की संभावना है। उन्होंने संसाधन का संरक्षण और पुन: स्थापना के लिए सामुदायिक वन अधिकार समिति के गठन, सामुदायिक वन अधिकार मैनेजमेंट प्लान के निर्माण और क्रियान्वयन पर जोर दिया,

सामुदायिक वन अधिकार के अंतर्गत जीपीडीपी से जोड़ते हुए एकीकृत गांव विकास की योजना वन उत्पाद, पौध नर्सरी एवं बांस उद्योग की संभावना के संबंध में कहा। उन्होंने कहा कि नये दृष्टिकोण के साथ आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केन्द्रित करने की जरूरत है। कार्यशाला में श्री विजेन्द्र ने वन अधिकार के संबंध में श्री प्रखर ने सामुदायिक वन संसाधन में ग्राम की पंरपरागत सीमाओं के भीतर वन भूमि के संबंध में जानकारी दी। श्री प्रखर ने बताया कि पंरपरागत सामान्य वन भूमि के अंतर्गत आरक्षित वन, संरक्षित वन और संरक्षित वन की भूमि जिनपर सामुदायिक की पारंपरिक पहुंच थी। वहीं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार ग्राम की पारंपरिक सीमा के भीतर वन संसाधनों पर अनुसूचित जातियों, अन्य परंपरागत वनवासियों, विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह, कृषि पूर्व समुदाय, चरवाहों, घुमनतू जनजातियों के अधिकार के अंतर्गत गोचर भूमि का मौसमी उपयोग एवं जल निकायों का उपयोग तथा मौसमी संसाधनों पर पहुंच होगी। कार्यशाला में सभी एसडीएम एवं जनपद सीईओ ने सक्रियता के साथ अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

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