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साल्हेवारा बना सट्टा का अड्डा, पुलिस नही पाट पा रही गढ्ढा, इधर बच्चों से लेकर बुढ़ों को लग रही गच्चा !….. पढ़िए व्यंग्य बाण सिर्फ DNnews पर…

जमुरे- कैसा चल रहा है अपना काम,

भाऊ- एकदम परफेक्ट है भाऊ, अपुन सबसे मिलकर चलते है.

जमुरे- इस महिने कैसा रहा इंकम.
भाऊ- इस महिने थोड़ा लोचा होगेरिला

जमुरे – तो क्या सब लोग शांत हो गया क्या.
भाऊ- नही भाऊ सब लोग थानाच पहुंच रिला, अभी मामला शांत नही हुआ है.

जमुरे- तो लिफाफा भेजो न सभी को
भाऊ- भाऊ अपुन के पास थोड़ा पैसा कम है करके पटा नही पा रहे है, कुछ भेज दो न भाऊ।

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यहां शिकायत का नही होता सुनवाई,
क्योंकि खाईवाल करता है. लिफाफा देने का अगुआई।

यही सट्टा ने एक व्यक्ति की ले ली जान,
परिजनो को पुलिस कह रही मेरी कहना मान ।

सुसाइट नोट देखने परिजन परेशान है.
यहां सट्टा के खाईवाल बड़ा भाईजान है।

नेताओ को जाता है कमीशन,
तो सट्टा चलाने का क्या परमिशन।

ऐसा नही कि नेता नही जानते,
इसके विरोध मे अपनी बाण कभी नही तानते।

उन्हे पता तो है. विरोध करेंगे तो कमीशन नही मिलेगा,
कीचड़ मे कभी कमल नही खिलेगा।

ग्रामीण तो सट्टा से हो रहे बर्बाद,
इधर खाईवाल आबाद ही आबाद।

शाम को चार बजते ही लग जाता है मजमा,
कल्याण का सुनने को गजल व नगमा।

दस घर मे एक घर तो मिलता है.
बेवकूफ बन जनता फटे कपड़े सीलता है।

जब शिकायत होती है तो क्यों नही होती सुनवाई,
जनता का कुछ तो सूनो मेरे भाई।

पुलिस दिखावे की करती है कार्यवाही ,
छुटपुट सटोरियों को पकड़ लुटती है वाहवाही।

बहुत नाम चलता है सट्टे मे साल्हेवारा का,
गुणां भाग मे लगे रहते है. यहां मोहल्ले व पारा का।

सुसाइड नोट भी एक मुद्दा बन गया है.
परिजनों के लिए सिर दर्द बन गया है।

खाईवाल के नाम से लिखा सुसाइड नोट .
परेशान होकर फंदे मे चढ़ गया भाजीडोंगरी के सरोज।

और कितना प्रताड़ित होगा भोलेभाले जनता,
सट्टा तो बंद करवादो, इतना हक तो बनता।

आखिर क्यों प्रशासन मौन है,
नाम जानकर पुछते है खाईवाल कौन है।

अब चल गया है पता खाईवाल के नाम का,
तो करो कार्यवाही खाईवाल के काम का।

बेखौफ रहते है खाईवाल के जमुरे,
चखना मे खाते है चिप्स और कुरकुरे।

आखिर बंद लिफाफे मे जाता होगा उपर तक मोटी रकम,
इसलिए खाईवाल वाल को मत समझो कम।

ये तो छत्तीसगढ़ है, आखिर साल्हेवारा सट्टा का गढ़ है।

खाईवाल का जनता उपर रहता है खासा दबाव,
और कहते है कम लागत मे ज्यादा कमाव।

जिले तक फैला है कारोबार सट्टे का,
जानबूझकर कार्यवाही नही होती पठ्ठे का।

नोट-: यह व्यंग्य बाण हालात के हिसाब से लिखा गया है.

👉 अगले अंक मे और भी पढ़िए……

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