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सोसायटियों में खाद का गहराया संकट, किसान लगा रहे हैं सोसायटी का चक्कर !

बाजार अतरिया ! DNnews- छत्तीसगढ़ प्रदेश में मौसम विभाग के जानकारी के मुताबिक दो-तीन दिनों में मानसून आने ही वाला है. ऐसे में आए खेती किसानी के दिनों में बाजार अतरिया क्षेत्र के विभिन्न सेवा सहकारी समितियों में किसान खाद बीज के लिए चक्कर लगा रहे हैं. साथ ही खाद बीज के साथ-साथ केसीसी के लिए भी बैंकों व सेवा सहकारी समितियों में होड़ मची हुई है बतादें कि अभी आए खेती किसानी के दिनों में क्षेत्र के विभिन्न सेवा सहकारी समिति एवं सेवा सहकारी उप समितियों में डीएपी खाद की भारी-भरकम कमी देखी जा रही है जिससे रोजाना सैकड़ों की जनसंख्या में समितियों में किसान पहुंच रहे हैं. खाद नहीं होने से बैरंग लौट रहे हैं लगातार किसानों द्वारा सोसायटी के चक्कर लगा रहे हैं ऐसे में किसान खेती किसानी करने के लिए खेती खार को सुधारने के बजाय किसान खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं ऐसे में आय खेती किसानी के दिन में खाद की उपलब्धता का नहीं होना समझ से परे है. ऐसे में किसान चिंतित दिखाई दे रहे हैं समय रहते अगर किसानों को खाद बीज की उपलब्धता नहीं हुई तो किसानों के लिए समस्या खड़ी हो सकती हैं और किसान कृषि केंद्रों व खाद दुकानों से महंगे दामों में खाद लेने मजबूर पड़ सकते हैं।

▶️ इन सोसायटियो में नहीं मिल रहा डीएपी खाद

मिली सूत्रों के जानकारी के मुताबिक क्षेत्र के सेवा सहकारी समिति रगरा, कामठा, मड़ौदा एवं बाजार अतरिया सहित आसपास के सेवा सहकारी समितियों में डीएपी खाद की भारी-भरकम कमी देखी जा रही है. इन सोसायटी में डीएपी खाद की उपलब्धता अभी तक नहीं हो पाई है. कुछ ऐसे सेवा सहकारी समिति हैं जहां अभी तक एक बोरी भी खाद नहीं पहुंच पाई है. हम पाठकों को बतादे की खेती किसानी के सीजन लगने से पहले ही कृषकों द्वारा खाद बीज सहित विभिन्न उपकरण के सहित सभी सामग्रियां की उपलब्धता कर ली जाती है. वहीं सेवा सहकारी समितियों से केसीसी के तहत ऋण एवं खाद बीज लेजाकर रख लिया जाता है लेकिन अब खेती किसानी का सीजन लग गया है लेकिन अभी भी किसान खाद के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं।

▶️ प्राइवेट खाद दुकान एवं कृषि केंद्रों की ओर किसानों का रुख

क्षेत्र के सेवा सहकारी समितियों में लगातार डीएपी खाद की भारी-भरकम कमी देखी जा रही है जिससे किसानों में नाराजगी भी देखी जा रही हैं आय खेती किसानी के दिनों में खाद की कमी के चलते कृषक काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं. जिससे कृषक क्षेत्र के प्राइवेट खाद दुकानों एवं कृषि केंद्र की ओर बढ़ रहे है जो की प्राइवेट दुकानों में खाद बीज की कीमत आसमान छू रहे हैं. जो मध्यम वर्ग के कृषक खाद लेने में सक्षम नहीं और तो और प्राइवेट दुकानों में नगद राशि देकर खाद बीज लेना पड़ रहा है जिससे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जो कि आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है वहीं कृषि कार्य में खर्च भी अधिक पड़ रहा है साथ ही प्राइवेट दुकानदार कृषकों से मोटा रकम वसूल रहे हैं ऐसे में समय रहते खाद की उपलब्धता नहीं की गई तो काफी दिक्कतों का सामना कृषकों को करना पड़ सकता है।

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