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हलषष्ठी का व्रत व पूजा कर महिलाओ ने अपने बच्चों की लम्बी उम्र के लिये की कामना !

Dileep shukla salhewara.

साल्हेवारा ! DNnews- वनांचल ग्राम साल्हेवारा में व वनांचल के सभी क्षेत्रों में संतान की सुख समृद्धि,उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु जीवन के लिए सभी माताओं ने निर्जला कमरछठ/हलषष्ठी माता का उपवास रख कर धूमधाम से (सगरी)हलषष्ठी माता की पूजा अर्चना की व बच्चों व परिवार की सुख समृद्धि की कामना की.

पुलिस थाना चौक साल्हेवारा में मोहल्ले की महिलाओं ने एक जगह एकत्र होकर श्रीमती उषा शुक्ला के घर के सामने सगरी व अन्य सामग्री की व्यवस्था कर मोहल्ले की श्रीमती रंजीता चक्रवर्ती,सुनीता बाई,जान्हवी चक्रवर्ती,श्रीमती उषा शुक्ला व अन्य बहुत सी महिलाओं ने विधि विधान से पूजा अर्चना की वही बच्चों ने इनकी पूजा मे सम्मिलित होकर आनन्द उठाया बच्चों में राजकुमारी,पिंकी,श्रुति,हिमांशु, शनि शुक्ला,आदि सम्मिलित रहे,पंडित हिमांशु शुक्ला ने कथा वाचन किया व पूजा करवाई।पिंकी चक्रवर्ती ने सहयोगी की भूमिका निभाई व इन सबकी सेवा व सहयोग भारत सोनी ने किया.

इसी कड़ी में 28-8-2021 रामपुर में हलषष्ठी का व्रत रख महिलाओ ने अपने बाल बच्चों के लिये लम्बी उम्र की मनोकामना की.यह परम्परा सनातन काल से चली आ रही है यह उपवास सतयुग में माता पार्वती भी अपने पुत्र कार्तिकेय गणेश की लम्बी उम्र के लिये रखी थी. त्रेतायुग युग में मा सीता लवकुश के लम्बी उम्र के लिये व्रत रखी थी.द्वापर में कंश की क्रूर अत्याचार से अपने बच्चे सात बच्चे खो जाने वाली देवकी भी आठवें पुत्र की जन्म होने से दो दिन पहले कारागर में बंद रहते यह हलषष्ठी का व्रत रखी ।भगवान की अपार शक्ति से अष्ठमीं को भादो की विकराल अंधेरी रात कारागर में ही देवकी ने आठवें पुत्र श्री कृष्ण को जन्म दी और कारागर के बंद पट खुल गये पहरेदारों को नींद आ गयी नंदबाबा और देवकी घोर बरसात अंधेरी रात में मथुरा से गोकुल श्री कृष्ण को टोकरी में लेकर यशोदा के पास छोड़ आये ।
उस दिन से यह हलषष्ठी का पर्व‌‌‌ पुत्र रक्षा के लिये संपुर्ण भारत की नारी में प्रथा प्रचलन में आ गया ।जो सत्य है यह संस्कार रुपी हलषष्ठी के दिन मातायें नीम का दातुन बनाते है महुआ के चम्मच से खाना बनाते है पसहर चांवल की चावल का भात खाते है बगैर नागर चले सब्जी भाजी खाते है हल चला हुआ जमीन पर नही चलतें है ।भैस का दही दुध का उपयोग करते है ।यह व्रत बहुत ही संयम नियम का है । मोहल्ले भर के महिलाए एक स्थान पर सामुहिक रुप से सगरी के आस पास गोलाकार में बैठ कर पूजा अर्चना कर विधिवत पंडित जी को दान दक्षिणा कर उपवास को तोड़ते है ।नारीयल एवं सात प्रकार की लाई धान गेहु चना बटरा एवं अन्य अनाजों का मिश्रण कर प्रसाद वितरण करते है शाम होते ही सभी माताये अपने बच्चों के बायें साइड पीठ पर कपड़े से पोता सात बार मारते है.
फिर फरारी कर रात्री विश्राम करते है यह हलषष्ठी का व्रत मां और पुत्र का जीवन रक्षक के रुप में मनाया जाता है.

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