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2 अगस्त से स्कूल खोलने की अनुमति, लेकिन तैयारियां अभी भी अधुरी,

रायपुर ! DNnews- वैसे तो राज्य सरकार 2 अगस्त से शाला प्रबंधन समिति ,सरपंच व पार्षदों से राय मशविरा कर स्कूल खोलने की अनुमति दे दी है. लेकिन छत्तीसगढ़ के अधिकांश स्कूल गंदगी से भरे पड़े है. हालात ऐसा है कि बच्चों के बैठने के लायक नही है. बारिश के मौसम मे कीड़े मकोड़े अधिकतर निकलता रहता है. इससे बच्चों को बचाकर रखना बेहद जरूरी है.

▶️ क्लास रूम सहित परिसर की सफाई जरूरी

बतादें कि जब से कोरोना का इंट्री हुआ है तब से स्कूल बंद है. वही ज्यादातर स्कुलों को कोरोना के समय क्वारेंटाईन सेंटर बनाकर रखा गया. था. छत्तीसगढ़ के अधिकांश स्कूलों मे अभी तक साफ सफाई भी नही हुआ है. ऐसे मे बच्चों को बिना साफ सफाई के स्कूल मे इंट्री कराना किसी खतरे से कम नही है. स्टाफ रूम के अलावा बाकी के कक्षा मे दो साल से झाड़ू तक नही लगा है. बंद कमरे मे धुल आदि जम चुका है. जिसकी सुध अभी तक न तो पालको ने ली है और ना ही शिक्षकों ने. स्थिति ऐसा ही रहा तो बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

▶️ शौचालय भी बदतर स्थित मे

अधिकांश स्कूलों मे बालक बालिका के लिए अलग-अलग शौचालय का निर्माण किया गया है. लेकिन दूसरों को शिक्षा देने वाले शिक्षा विभाग का खुद का शौचालय तितर बितर है. यानि शौचालय तो है लेकिन रख रखाव के अभाव मे शौचालय क्षतिग्रस्त हो चुका है. यहां पढ़ने आने वाले बच्चों को शौच के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. बच्चों के सेहत को ध्यान मे रखते हुए शौचालय के उपर भी ध्यान देना जरूरी है. बतादें कि अधिकांश स्कूलों मे दिव्यांग जनों के लिए भी शौचालय का निर्माण कराया गया है. लेकिन अधिकांश स्कूलों मे दिव्यांग जनों के पहुंच के अनुरूप शौचालय का निर्माण किया गया है. वही शौचालय मृत अवस्था मे है. इससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा विभाग सफेद घोड़ा बनकर कितना हवा मे चलती है.

▶️ सुपरविजन केवल दिखावा

बतादें कि स्कूल के सफल संचालन के लिए जिला स्तर जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लाक लेवल पर विकास खंड शिक्षा अधिकारी और संकुल लेबल पर संकुल समन्वयक कार्यरत है. लेकिन वनांचल क्षेत्रों सहित ग्रामीण क्षेत्रों मे इन अधिकारियों के द्वारा ठीक से सुपरविजन नही किया जाता. अधिकतर संकुलों मे संकुल समन्वयको को सुपरविजन करना रहता है लेकिन हवा हवाई सुपरविजन के चलते आज व्यवस्था जस की तस है.

▶️ अधिकांश स्कूलों मे शिक्षक सयम का पालन नही करते

बतादें कि छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां हर साल शिक्षा मे गुणवत्ता लाने के लिए तरह तरह की स्कीम लांच करते है. लेकिन सभी स्कीम ठंडे बस्ते मे चले जाते है.इसका कारण शिक्षकों का स्कूल को समय न देना. यहां अधिकांश शिक्षक समय पर स्कूल नही पहुंचते और समय से पहले घर चले जाते है. इसका एक और कारण ये भी ह कि अधिकांश शिक्षक मुख्यालय मे नही रहते और रोजाना 40-50 किलोमीटर का सफर तय करते हैं भला ऐसे मे शिक्षा मे गुणवत्ता का कल्पना करना मुश्किल है.

▶️ गतिविधियों पर नही देते ध्यान

बतादें कि अधिकांश स्कूलों मे पढाई के अलावा खेल,संस्कृति, पर्यावरण, जयंती, स्वच्छता आदि पर ध्यान नही दिया जाता. यही कारण है कि बच्चे पढ़ाई के अलावा दूसरा और कुछ सीख नही पाते. हालांकि शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बच्चों को शिक्षा दे रही है. अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग अपनी नीतियों पर कितना अमल करते है.

▶️ कौन सी कक्षा खुलेंगे और कौन सा रहेंगे बंद

शासन के निर्देशानुसार कक्षा पहली से पांचवीं तक के स्कूल खुलेंगे. वही मिडिल मे केवल आठवी कक्षा ही संचालित होगा. इसके अलावा 10 वी और 12 कक्षा को ही संचालन की अनुमति प्राप्त हुई है. बतादें कि उक्त स्कूल कोविड प्रोटोकॉल के तहत संचालित होना है. सात दिन तक 1 प्रतिशत से कम संक्रमित होने के स्थिति मे विद्यालय खोलने की अनुमति दी गई है. ग्रामीण क्षेत्रों मे पहली से पांचवी तक के कक्षा व आठवी के संचालन के लिए शाला प्रबंधन समिति व सरपंच की सहमति आवश्यक है. इसके अलावा शहरी क्षेत्रों मे शाला प्रबंधन व वार्ड पार्षद की सहमति अनिवार्य है. तभी स्कूल संचालन हो पाएगी.

बतादें कि स्कूल संचालन के सतत मानिटरिंग के लिए राज्य लेबल व जिले लेबल के अधिकारी 10 स्कूलों का निरीक्षण भी करेंगे.

“हमने सभी ब्लाक शिक्षा अधिकारी, बीआरसी व प्राचार्यों को पृष्ठांकन कर दिया है. इसके अलावा कलेक्टर साहब ने टीएल के बैठक मे भी निर्देश दे चुके है कि शाला को साफ सुथरा व स्वच्छ बनाए रखें.”
एचआर सोम जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव

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