खैरागढ़। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को संस्थापक राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह, रानी पद्मावती और राजकुमारी इंदिरा सिंह के योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा, संस्थापक परिवार की सदस्य शताक्षी सिंह, कुलसचिव, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने संस्थापक राजपरिवार के चित्रों पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के गायन से हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे राजपरिवार के त्याग, कला के प्रति समर्पण और दूरदर्शी सोच को याद करते हुए संस्थान की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
ईमानदारी और समर्पण से आगे बढ़ाएं विश्वविद्यालय : कुलपति
कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि संस्थापक राजपरिवार ने कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में जो दूरदर्शी पहल की, उसे आगे बढ़ाना विश्वविद्यालय परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षकों एवं कर्मचारियों से ईमानदारी, कर्मठता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर संस्कार देकर तैयार करना तथा विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
राजपरिवार का योगदान विश्वविद्यालय की मजबूत नींव : प्रो. राजन यादव
कार्यक्रम का संचालन करते हुए लोक संगीत एवं कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजन यादव ने संस्थापक राजपरिवार के योगदान को विश्वविद्यालय की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि राजा-रानी द्वारा अपनी संपत्ति और विशाल महल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दान करना दूरदर्शी सोच का उदाहरण है। उन्होंने विश्वविद्यालय की तुलना बरगद के वृक्ष से करते हुए कहा कि जिस प्रकार बरगद अनेक पक्षियों को आश्रय देता है, उसी प्रकार यह विश्वविद्यालय देश-विदेश से आने वाले विद्यार्थियों और कलाकारों को कला-साधना का मंच प्रदान कर रहा है।
कार्यक्रम में कुलसचिव वेंकट रमण गुडे, प्रो. राजन यादव, अधिष्ठाता नृत्य संकाय प्रो. नमन दत्त, अधिष्ठाता संगीत संकाय प्रो. मानस साहू, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. देवमाई, सहायक कुलसचिव डॉ. विजय सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से संस्थापक राजपरिवार के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन प्रो. राजन यादव ने किया।



