खैरागढ़। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में खैरागढ़ विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा ने केसीजी जिले के स्वास्थ्य विभाग में दवा एवं उपकरण खरीदी में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य विभाग को मिली राशि और उसके उपयोग को लेकर सवाल पूछे।
स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में दिए लिखित जवाब में बताया कि केसीजी जिले को वर्ष 2025-26 में रेगुलर मद से 49 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मद से 13 करोड़ 25 लाख रुपये आबंटित किए गए। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि दवा एवं उपकरणों की खरीदी मांग के आधार पर की गई है।
इसी जवाब को आधार बनाते हुए विधायक यशोदा वर्मा ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मांग के अनुरूप करोड़ों रुपये की दवाइयां और उपकरण खरीदे गए हैं तो जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में दवाइयों की कमी क्यों बनी हुई है? आखिर मरीजों को आज भी निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है?
विधायक ने आरोप लगाया कि हाल ही में करीब दो करोड़ रुपये की दवा खरीदी गई, लेकिन जब उन्होंने स्वयं अधिकारियों से दवाइयों का भौतिक सत्यापन कराने की बात कही तो CMHO और BMO ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि दवाइयां खरीदी जा चुकी हैं, लेकिन उनका बिल अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।
वीडियो देखें
https://www.facebook.com/share/v/176kFCJ5yT/
यशोदा वर्मा ने कहा कि यदि खरीदी हो चुकी है और बिल उपलब्ध नहीं है, तो आखिर खरीदी की वास्तविक कीमत, गुणवत्ता और प्रक्रिया का सत्यापन कैसे किया जाएगा? इससे पूरे मामले में गंभीर अनियमितता और घालमेल की आशंका पैदा होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में बिना टेंडर के मनमानी दरों पर दवा एवं उपकरणों की खरीदी की जा रही है। उनका कहना है कि रेगुलर और NHM मद के अलावा CGMSC के माध्यम से भी दवाइयों और उपकरणों की आपूर्ति होती है, इसके बावजूद अधिकांश अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तथा विकासखंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की खरीदी में अनियमितताएं की जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि बिना पर्याप्त प्रक्रिया के खर्च दर्शाया जा रहा है तथा एक वर्ष में लगभग 80 लाख रुपये प्रशिक्षण शिविरों पर खर्च दिखाए गए हैं, जिसकी भी जांच आवश्यक है।
यशोदा वर्मा ने कहा कि विधानसभा में मिले जवाब और जमीनी स्थिति में भारी विरोधाभास है। यदि सरकार कह रही है कि मांग के अनुसार पूरी राशि उपलब्ध कराई गई और खरीदी भी उसी आधार पर हुई, तो अस्पतालों में दवाओं और उपकरणों की कमी आखिर क्यों है? यह सवाल पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, जांच दल गठित करने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
नोट: इस खबर में लगाए गए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा के बयान एवं विधानसभा में पूछे गए प्रश्न पर आधारित हैं। संबंधित स्वास्थ्य विभाग एवं अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
Part - 1



