खैरागढ़। जिला मुख्यालय स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी/अंग्रेजी माध्यम शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला इन दिनों पढ़ाई से ज्यादा अपने एक अनोखे प्रशासनिक आदेश को लेकर चर्चा में है। यहां प्राचार्य कमलेश्वर सिंह ने ऐसा आदेश जारी कर दिया, जिसे देखकर सवाल उठने लगा—स्कूल में एक प्राचार्य काफी नहीं थे या सप्ताह के सात दिनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था जरूरी हो गई थी?
दरअसल, प्राचार्य ने 24 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर प्रथम पाली में संचालित अंग्रेजी माध्यम शाला के सुव्यवस्थित संचालन के लिए हिंदी माध्यम के छह अलग-अलग व्याख्याताओं को सप्ताह के छह दिनों के लिए ‘प्रभारी प्राचार्य’ नियुक्त कर दिया। यानी सोमवार को एक प्राचार्य, मंगलवार को दूसरा और इसी तरह शनिवार तक प्राचार्य की कुर्सी की जिम्मेदारी बदलती रहती।
हालांकि यह ‘छह प्राचार्य वाला प्रयोग’ ज्यादा दिन नहीं चल सका। मामला जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंचते ही आदेश पर ब्रेक लग गया और डीईओ ने इसे तत्काल निरस्त कर दिया।
सोमवार को कुणाल, मंगलवार को गिरवर... शनिवार को अखिलेश
प्राचार्य के आदेश के अनुसार रसायन शास्त्र के व्याख्याता कुणाल टंडन को सोमवार, भौतिक शास्त्र के व्याख्याता गिरवर कोसरे को मंगलवार, जीव विज्ञान की व्याख्याता विनिता सिंह को बुधवार, हिंदी की व्याख्याता उपमा देवी त्रिपाठी को गुरुवार, वाणिज्य के व्याख्याता गुंजन सिंह को शुक्रवार तथा अंग्रेजी के व्याख्याता अखिलेश श्रीवास्तव को शनिवार के लिए प्रभारी प्राचार्य बनाया गया था।
आदेश में इन ‘दिवसीय प्राचार्यों’ को स्कूल में संविदा शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, प्रत्येक कालखंड में पढ़ाई कराने और विद्यार्थियों में अनुशासन बनाए रखने जैसी जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं।
यानी सप्ताह शुरू होते ही प्राचार्य की कुर्सी बदलती और शनिवार तक आते-आते पूरा सप्ताह ‘प्राचार्य रोटेशन योजना’ के तहत चलता।
आदेश की कॉपी अधिकारियों तक भी पहुंची
इस पूरे मामले की दिलचस्प बात यह है कि यह कोई मौखिक या कमरे के अंदर का प्रयोग नहीं था। बाकायदा आदेश जारी हुआ और उसकी प्रतिलिपि कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी को भी भेजी गई।
अब सवाल यह है कि जब आदेश की प्रतियां बड़े अधिकारियों तक भेजी जा रही थीं, तो फिर इसे जारी करने से पहले नियमों की किताब क्यों नहीं देखी गई?
प्राचार्य के पास ‘प्रभारी प्राचार्य’ बनाने का अधिकार?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या किसी विद्यालय के प्राचार्य को अपनी जगह किसी अन्य शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त करने का अधिकार है?
स्कूल शिक्षा विभाग की व्यवस्था के मुताबिक प्राचार्य पद का नियमित अथवा प्रभारी प्रभार सक्षम अधिकारी की विभागीय प्रक्रिया और आदेश के तहत दिया जाता है। प्राचार्य अपनी अनुपस्थिति, स्थानांतरण अथवा अन्य परिस्थितियों में वरिष्ठ व्याख्याता को प्रभार सौंपने की प्रक्रिया में हो सकते हैं, लेकिन सप्ताह के अलग-अलग दिनों के लिए अलग-अलग शिक्षकों को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त करने का अधिकार प्राचार्य स्तर पर नहीं माना जाता।
डीईओ का फोन आया और ‘छह प्राचार्यों’ की व्यवस्था गई
जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल केपी साव ने बताया कि उन्हें आदेश व्हाट्सएप के माध्यम से मिला था। आदेश की जानकारी मिलते ही उन्होंने प्राचार्य कमलेश्वर सिंह से फोन पर बात की और इस तरह की कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए।
डीईओ ने स्पष्ट किया कि प्राचार्य के रहते किसी अन्य शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यरत नहीं किया जा सकता। इसके बाद संबंधित आदेश को तत्काल निरस्त कर दिया गया।
यानी सोमवार से शनिवार तक चलने वाली ‘प्राचार्य व्यवस्था’ शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई।
शाला विकास समिति भी रही बेखबर
मामले में शाला विकास समिति के अध्यक्ष आलोक श्रीवास भी इस आदेश से अनजान नजर आए। उन्होंने कहा कि प्राचार्य द्वारा इस संबंध में उनसे कोई चर्चा नहीं की गई और उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है।
सवाल आदेश पर है, शिक्षकों पर नहीं
बहरहाल, छह शिक्षकों को छह दिनों के लिए प्रभारी प्राचार्य बनाने का यह अनोखा आदेश अब शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षकों को जिम्मेदारी देना अपनी जगह है, लेकिन प्राचार्य की कुर्सी को सप्ताह के हिसाब से बांट देना विभागीय नियमों और अधिकारों को लेकर कई सवाल जरूर खड़े करता है।
डीईओ ने समय रहते आदेश निरस्त कर दिया, वरना शायद स्कूल में सोमवार को ‘प्राचार्य साहब’, मंगलवार को ‘प्राचार्य सर’ और शनिवार को ‘प्राचार्य जी’ के नाम से नई परंपरा शुरू हो जाती।
अब असली सवाल यही है—जब नियमों में ऐसी व्यवस्था का प्रावधान नहीं था, तो फिर यह आदेश जारी करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?



