खैरागढ़। राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय Rajkumari Indira Singh Kala Sangit Vishvvidyalay khairagarh के कैंपस-2 स्थित ऑडिटोरियम में प्रसिद्ध नाटककार डॉ. शंकर शेष का चर्चित नाटक ‘एक और द्रोणाचार्य’ मंचित किया गया। डॉ. शिशु कुमार सिंह के निर्देशन में हुई इस प्रस्तुति ने दर्शकों को महाभारत की कथा के माध्यम से आज की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक परिस्थितियों से रूबरू कराया। कलाकारों के प्रभावी अभिनय ने ऐसा माहौल बनाया कि दर्शक नाटक के अंत तक उससे जुड़े रहे।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा सहित डॉ. राजन यादव, डॉ. मानस साहू और डॉ. कौस्तुभ रंजन उपस्थित रहे।
एकलव्य की कथा से वर्तमान व्यवस्था तक पहुंचा नाटक
नाटक की शुरुआत महाभारत के एकलव्य और द्रोणाचार्य की कथा से होती है। निषाद पुत्र एकलव्य धनुर्विद्या सीखने के लिए द्रोणाचार्य के पास पहुंचता है, लेकिन अर्जुन को श्रेष्ठ धनुर्धर बनाने का वचन दे चुके द्रोणाचार्य उसे अपना शिष्य बनाने से इंकार कर देते हैं।
इसके बाद एकलव्य जंगल में द्रोणाचार्य की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर उसे अपना गुरु मानता है और स्वयं अभ्यास करता है। अपनी कड़ी साधना के बल पर वह असाधारण धनुर्धर बन जाता है। जब द्रोणाचार्य को उसकी प्रतिभा का पता चलता है, तो वे गुरु दक्षिणा के रूप में उसका दाहिना अंगूठा मांग लेते हैं।
नाटक इसी चर्चित प्रसंग को वर्तमान समय से जोड़ते हुए प्रतिभा, अवसर और व्यवस्था के बीच के संबंधों पर सवाल खड़ा करता है।
अदालत के दृश्य ने उठाया व्यवस्था पर सवाल
मंचन के दौरान अदालत का दृश्य विशेष रूप से प्रभावशाली रहा। वकील और जज के माध्यम से यह सवाल सामने आया कि यदि किसी व्यक्ति में प्रतिभा है, लेकिन उसे आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलता, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
प्रिंसिपल और प्रेसिडेंट जैसे पात्रों के जरिए शिक्षा व्यवस्था की परिस्थितियों को सामने रखा गया। वहीं अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर और अश्वत्थामा जैसे पात्रों ने महाभारत के प्रसंगों को वर्तमान संदर्भ से जोड़ने का काम किया।
इस तरह नाटक केवल पौराणिक कथा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता रहा कि आज के समाज में भी कहीं प्रतिभाओं के साथ ‘एकलव्य’ जैसा व्यवहार तो नहीं हो रहा।
कलाकारों ने निभाई अलग-अलग भूमिकाएं
नाटक में हर्षित डेहरिया ने द्रोणाचार्य की भूमिका निभाई, जबकि वंदिता पांडेय एकलव्य और वकील के किरदार में नजर आईं। आशुतोष द्विवेदी ने अरविंद लीला, दीक्षा बघेल ने कृपि और हर्ष अग्रवाल ने प्रेसिडेंट की भूमिका निभाई।
अंजली सिंह ने यदु और अश्वत्थामा, प्रांशु पांडेय ने चंदू, याचिका ने वकील-2, सुगंधा ने अनुराधा और ओमेंद्र ने विमलेंदु का किरदार निभाया। रूद्र ने भीम, प्रिंसिपल और युधिष्ठिर की भूमिका निभाई।
वहीं याचना छोटे अश्वत्थामा, श्रेया सैनिक, विशाल अर्जुन और दीपाली जज की भूमिका में नजर आईं।
मंच के पीछे भी टीम ने संभाली जिम्मेदारी
प्रस्तुति को प्रभावी बनाने में मंच के पीछे की टीम की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। हर्ष अग्रवाल और ओमेंद्र ने प्रकाश एवं मंच सज्जा की जिम्मेदारी संभाली। संगीत आशुतोष द्विवेदी, छत्रपाल और हर्षित ने दिया। पार्श्व मंच प्रबंधन दीक्षा बघेल ने संभाला, जबकि वेशभूषा की जिम्मेदारी वंदिता पांडेय ने निभाई।
आशुतोष द्विवेदी ने सहायक निर्देशक के रूप में सहयोग किया। कलाकारों और तकनीकी टीम के सामूहिक प्रयास से ‘एक और द्रोणाचार्य’ की प्रस्तुति प्रभावशाली रही और दर्शकों से सराहना मिली।



