खैरागढ़। जिले में इन दिनों एक सवाल आम जनता के बीच तेजी से घूम रहा है — आखिर शिकायत करें भी तो क्यों करें? क्योंकि शिकायत करने से अगर कुछ होता ही नहीं, तो जनता भी अब सोचने लगी है कि सीधे अवैध कारोबारियों से “सेटिंग” सीख ली जाए।
हम बात कर रहे हैं जिले के खनिज विभाग की, जहां शिकायतों का असर शायद फाइल के वजन तक ही सीमित रह गया है। कलेक्ट्रेट में शिकायतें पहुंचती जरूर हैं, लेकिन उनका क्या होता है, यह किसी रहस्य से कम नहीं। कुछ लोग मजाक में कहते हैं कि शिकायतें या तो रद्दी की टोकरी में जाती हैं, या फिर पुड़िया बनाने के काम आती होंगी। क्योंकि जिले में अवैध ईंट भट्ठा, अवैध रेत सप्लाई, मुरूम खनन और ओवरलोड गाड़ियों का खेल बिना किसी डर के लगातार जारी है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि कार्रवाई सिर्फ खबरों में दिखाई देती है, जमीन पर नहीं। जिले के जालबांधा, बाजार अतरिया, पांडादाह, पैलीमेटा, उदयपुर, गंडई और साल्हेवारा क्षेत्र में लंबे समय से ईंट भट्ठों का धुआं उड़ रहा है, लेकिन विभाग की नजर शायद धुएं के पार नहीं जा पा रही।
ग्रामीणों का कहना है कि कई ईंट भट्ठे गांव, स्कूल, आंगनबाड़ी और अस्पतालों के बेहद करीब संचालित हो रहे हैं। जहरीला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है और आसपास की खेती भी प्रभावित हो रही है। खेतों की उपज क्षमता तक पर असर पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग शायद “सब ठीक है” मोड में काम कर रहा है।
नियमों की बात करें तो ईंट भट्ठा संचालन के लिए पर्यावरण अनुमति, प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन, कृषि भूमि उपयोग की अनुमति और तय दूरी के नियम अनिवार्य हैं। मिट्टी खुदाई के लिए भी अनुमति जरूरी होती है। लेकिन जिले में कई जगह नियमों को ऐसे नजरअंदाज किया जा रहा है, जैसे यह सिर्फ किताबों में लिखने के लिए बनाए गए हों।
सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि बिना “सेटिंग” के इतना बड़ा खेल संभव ही नहीं। अब सवाल यह है कि खनिज विभाग कार्रवाई करेगा या जनता सिर्फ शिकायत लिख-लिखकर कागज खराब करती रहेगी?


