खैरागढ़। जिले में अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार इस कदर “गरम” है कि अब इसकी तपिश गांवों के घरों तक पहुंचने लगी है। विकासखंड के ग्राम बढ़ईटोला में कथित रूप से बस्ती से सटाकर संचालित लाल ईंट भट्ठे के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सोमवार को खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर केसीजी एवं एसडीएम खैरागढ़ के नाम ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना अनुमति गांव की आबादी से महज तीन मीटर दूरी पर ईंट भट्ठा संचालित किया जा रहा है। कई महीनों तक लगातार जलती आग से उठने वाली गर्मी अब सीधे ग्रामीणों के घरों तक पहुंच रही है। धुएं और धूल से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की “ठंडी चुप्पी” अब भी कायम बताई जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि भट्ठे के आसपास करीब 20 मकान, खलिहान, कोठार और पैरावट मौजूद हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। गांव वालों का कहना है कि अगर नियमों के अनुसार भट्ठा 500 से 800 मीटर दूर संचालित होना चाहिए, तो फिर आबादी के बीच यह कारोबार आखिर किसकी मेहरबानी से चल रहा है?
मामला सिर्फ बढ़ईटोला तक सीमित नहीं है। सोनपुरी, घोटिया, दामरी, उदयपुर और साल्हेवारा समेत जिलेभर में बड़ी संख्या में ईंट भट्ठों के संचालन की चर्चा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पर्यावरणीय नियम और प्रशासनिक अनुमति शायद सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं, क्योंकि जमीन पर तो “धुएं का राज” चलता दिखाई दे रहा है।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे जिले में संचालित अवैध ईंट भट्ठों की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में सिर्फ जांच की औपचारिकता निभाता है या फिर वाकई नियमों की आग में अवैध भट्ठों पर कार्रवाई भी होती है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जागेश्वर तिलक, तेजराम, टिकेंद्र, ज्ञानिक, देवनाथ, भोजराज वर्मा, रमेश, पप्पू, परमेश्वर, झन्नूलाल, लोकनाथ, संगीता वर्मा (पंच), वेदराम वर्मा, शिवकुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


