छुईखदान। ग्राम पंचायत श्यामपुर के शासकीय प्राथमिक शाला भवन की जर्जर छत को लेकर करीब एक माह पहले खबर प्रकाशित हुई थी। खबर में स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा और संभावित हादसे की आशंका को प्रमुखता से उठाया गया था। उम्मीद थी कि खबर के बाद शिक्षा विभाग जागेगा और जिम्मेदार अधिकारी मौके का निरीक्षण कर जल्द कोई ठोस कदम उठाएंगे।
लेकिन लगता है कि विभाग की कार्रवाई अभी भी ‘आज-कल’ के सरकारी कैलेंडर में चल रही है।
मामला पुराना है, समस्या सामने है और पंचायत स्तर से भी पहल की जा चुकी है। ग्राम पंचायत के सरपंच दीपक सिंह बघेल का कहना है कि स्कूल भवन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज खंड शिक्षा अधिकारी के पास जमा किए जा चुके हैं। इसके बाद जब वे मामले की प्रगति जानने कार्यालय पहुंचते हैं तो कथित रूप से उन्हें ‘आज-कल’ कहकर टाल दिया जाता है।
सरपंच ने दस्तावेज दे दिए, अब विभाग किस दस्तावेज का इंतजार कर रहा?
यहां सवाल सिर्फ एक जर्जर छत का नहीं, बल्कि उन बच्चों की सुरक्षा का है जो रोज इसी भवन में पढ़ने पहुंचते हैं। जब समस्या की जानकारी विभाग तक पहुंच चुकी है, पंचायत दस्तावेज जमा कर चुकी है और मीडिया के माध्यम से मामला सार्वजनिक भी हो चुका है, तो फिर कार्रवाई की गाड़ी आखिर किस स्टेशन पर खड़ी है?
या फिर सरकारी प्रक्रिया में ‘आज-कल’ ही सबसे तेज कार्रवाई मानी जाती है?
जिला स्तर पर भेज दी जानकारी… अब जवाब आने का इंतजार
इस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी जीके सुधाकर से जब जानकारी ली गई तो उनका कहना है—
“जिला स्तर पर जानकारी भेज दी गई है। अभी तक जिला स्तर से कोई जानकारी नहीं आई है। जानकारी आने पर ही बता सकते हैं।”
यानी विकासखंड से जानकारी जिला पहुंच गई, अब जिला स्तर से जानकारी आने का इंतजार है। इस इंतजार के बीच स्कूल की छत अपनी जगह है, बच्चे अपनी जगह हैं और खतरा भी अपनी जगह।
बस कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं दे रही।
हादसा हुआ तो क्या तब आएगी ‘जानकारी’?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जर्जर छत का कोई हिस्सा अचानक गिर गया और कोई बच्चा इसकी चपेट में आ गया, तो क्या उस वक्त भी विभाग का जवाब यही होगा कि “जानकारी आने पर बता सकते हैं”?
हादसे के बाद निरीक्षण, जांच और जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि हादसे से पहले ही कार्रवाई कर दी जाए।
आखिर स्कूल की छत कोई ऐसी फाइल तो नहीं, जिसे लंबे समय तक टेबल से टेबल तक घूमाया जाए।
तीन सवाल, जिनका जवाब जरूरी है
पहला— श्यामपुर स्कूल भवन का तकनीकी निरीक्षण आखिर कब हुआ?
दूसरा— मरम्मत या नवनिर्माण के लिए अब तक क्या ठोस कार्रवाई की गई?
तीसरा— जब तक भवन सुरक्षित नहीं होता, तब तक बच्चों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
‘आज-कल’ कहीं ‘कल’ पर भारी न पड़ जाए!
ग्रामीणों की मांग है कि उच्चाधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्कूल भवन का निरीक्षण कराएं और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।
क्योंकि जर्जर छत को सरकारी फाइल की तरह इंतजार नहीं कराया जा सकता।
खबर के बाद भी अगर विभाग नहीं जागा, तो सवाल उठना लाजिमी है—क्या शिक्षा विभाग हादसे के बाद जागेगा?
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