“कंप्यूटर ऑपरेटर जगमोहन पर आरोप—कागजों में बांटा खाद, किसानों को मिला कर्ज”
खैरागढ़,खैरागढ़ में इन दिनों एक अनोखा “डिजिटल चमत्कार” देखने को मिल रहा है। सेवा सहकारी समिति डोकराभाठा ने ऐसा सिस्टम विकसित कर लिया है, जिसमें किसानों को खाद मिले या न मिले, लेकिन उनके खाते में कर्ज जरूर पहुंच जाता है।
करीब 8 गांवों के 200 किसान आज फिर कलेक्ट्रेट का रास्ता नापते नजर आए। वजह वही पुरानी—“हमने लिया नहीं, पर चढ़ गया” वाला कर्ज।
किसानों का कहना है कि समिति ने उनसे ज्यादा भरोसा “ऑनलाइन डेटा” पर कर लिया है। किसान कहते हैं—
“हमने खाद नहीं लिया”,
और सिस्टम जवाब देता है—
“पर हमारे रिकॉर्ड में तो ले लिया!”
यहां तो हालत ऐसी है कि खाद के लिए परमिट पहले कट जाता है, और खाद बाद में भी नहीं मिलता। मतलब “खाली बोरी, भारी कर्ज” योजना पूरी रफ्तार में है।
किसानों ने जब वास्तविक राशि जमा करने की कोशिश की, तो कंप्यूटर ऑपरेटर ने साफ कहा—
“ऑनलाइन में जितना दिख रहा है, उतना ही देना पड़ेगा।”
अब किसान सोच में हैं कि खेती करें या पहले “ऑनलाइन खेती” सीखें।
मामला तब और दिलचस्प हो गया जब पता चला कि कुछ किसानों के नाम पर खाद की एंट्री तो हो गई, लेकिन खाद खुद रास्ता भूल गया।
आज जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष देवराज किशोर दास वैष्णव के नेतृत्व में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपर कलेक्टर सुरेंद्र ठाकुर से मुलाकात की।
अपर कलेक्टर ने भी भरोसा दिलाया—“दो दिन में समाधान होगा।”
(किसान अब यह सोच रहे हैं कि ये दो दिन “ऑनलाइन” वाले हैं या असली वाले!)
इधर किसानों ने समिति प्रबंधन पर बड़ा आरोप लगाया है—
कि बिना अनुमति के खाद का परमिट काटा गया और केसीसी लोन भी “खुद-ब-खुद” निकल गया।
अब सवाल ये है कि अगर किसान बिना लिए कर्जदार बन सकता है,
तो क्या बिना बोए फसल भी उग जाएगी?
फिलहाल किसानों की मांग साफ है—
👉 जितना लिया है, उतना ही कर्ज माना जाए
👉 और “ऑनलाइन जादूगरों” पर सख्त कार्रवाई हो
बाकी अब नजर इस बात पर है कि
“दो दिन में समाधान” आता है या
“एक और अपडेट”!


