राजनांदगांव।
शुरुआत में एक्टिंग उनके लिए सिर्फ एक शौक था, लेकिन परिवार की अनुमति न मिलने के कारण वह अपने सपनों को खुलकर जी नहीं पा रही थीं। कॉलेज के दिनों में उनकी सहेलियाँ काजल घरडे और सरोज उन्हें बार-बार इस फील्ड में आने के लिए प्रेरित करती रहीं, लेकिन उस समय न तो घर का सहयोग था और न ही इंडस्ट्री की कोई जानकारी।
कहते हैं, ज़िंदगी में कभी-कभी एक छोटा-सा मोड़ पूरी कहानी बदल देता है — शीतल के जीवन में भी ऐसा ही हुआ। दोस्त नंदू साहू से एक सामान्य बातचीत के दौरान उन्हें पहला मौका मिला। कास्टिंग डायरेक्टर ओम तिवारी ने उन्हें एल्बम “गुरु घासीदास वंदना — मैं तोर चाहने वाला” में कॉमेडियन रोल ऑफर किया। यहीं से उनके अभिनय सफर की औपचारिक शुरुआत हुई।
### 🎥 मेहनत से बनाई अपनी पहचान
धीरे-धीरे शीतल ने अपनी लगन और जुनून के दम पर इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई। अब तक वह:
* 4 एल्बम
* 8 शॉर्ट फिल्में
* 12 फीचर फिल्मों
में काम कर चुकी हैं।
इनमें से 3 फिल्में रिलीज़ हो चुकी हैं —
🎬 गले लग जा मोर जान बा
🎬 बीए फाइनल ईयर
🎬 तोर मया मा सजनी
सिर्फ कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे भी उन्होंने अनुभव हासिल किया। निर्देशक रियाज़ सर की फिल्मों “प्रीत के रीत” और “जय वीरू” में उन्होंने असिस्टेंट के रूप में काम किया। इससे उन्हें फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझने का अवसर मिला।
### 🎞️ “काली रात” को लेकर उत्साह
शीतल इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म “काली रात” को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इस फिल्म में उनका किरदार चुनौतीपूर्ण है और दर्शकों को उनका एक नया रूप देखने को मिलेगा।
### 🏆 बड़ी उपलब्धि
13 सितंबर 2025 को उन्होंने एक और उपलब्धि अपने नाम की —
“छत्तीसगढ़ धरोहर 2025” में बेस्ट पर्सनैलिटी का खिताब जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाते।
### 🎯 आगे का लक्ष्य
शीतल का कहना है कि फिल्मों में उन्हें अच्छा काम मिला है, लेकिन अब वह एल्बम्स में भी मजबूत और प्रभावशाली प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना चाहती हैं। उनका लक्ष्य है कि वह धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए इंडस्ट्री में एक मजबूत नाम और पहचान स्थापित करें।
👉 संघर्ष से शुरू हुआ यह सफर अब सफलता की राह पर है — और शीतल की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सपने तो देखते हैं, लेकिन हालात से हार मान लेते हैं।


