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शिक्षा

खबर वही जो लगे सही : शिक्षा व्यवस्था की बदतर स्थिति, अधिकारियों की लापरवाही,प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते स्कूल

Dinesh Sahu

23-11-2024 12:59 PM
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छुईखदान ब्लाक में शिक्षा व्यवस्था में भारी खामियां

khairagarh,खैरागढ़ जिले के छुईखदान ब्लाक में शिक्षा व्यवस्था आज बदतर स्थिति से गुजर रही है। यहां के विभागीय अधिकारी और कर्मचारी लक्झरी जीवन जरूर जी रहे है.लेकिन स्कूली बच्चो को उनका अधिकार सही समय पर नहीं मिलना समझ से परे है. सुपरविजन के नाम पर ये अधिकारी दफ्तर से बाहर भी नहीं निकलते, यदि निकल भी रहे है तो सिस्टम आज भी सुधारा नहीं जा सका. अधिकारी का काम स्कूलों में जाकर उनकी स्थिति का निरीक्षण करना रहता है। लेकिन यहां के अधिकारी कागजी कार्यवाही में उलझकर बस रिपोर्ट्स दुरुस्त करने में लगे हैं।

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क्या शिक्षा में सुधार की कोई उम्मीद है?

ब्लाक के अधिकारियों के इस रवैये के कारण शिक्षण में सुधार की कोई उम्मीद की जा सकती है ये तो समय ही बताएगा। निचले स्तर के कर्मचारियों से भी काम की उम्मीद करना व्यर्थ हो सकता है, क्योंकि वे भी अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में टालमटोल करते दिखाई देते।

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स्वच्छता का मुद्दा: शौचालय की बदहाली

स्कूलों में शौचालय की हालत बेहद खराब

स्कूलों को शिक्षा का मंदिर तो कहा जाता है, लेकिन अगर वहां स्वच्छता की स्थिति खराब हो, तो किस प्रकार की शिक्षा की उम्मीद की जा सकती है? स्वच्छ भारत मिशन के तहत कई स्कूलों में शौचालय का निर्माण कराया गया है, लेकिन उनका उपयोग अब भी संभव नहीं है। शौचालयों की हालत ऐसी है कि कई स्कूलों में तो हर साल नया शौचालय बनाने का काम चलता है, लेकिन इस खर्च के बावजूद शौचालय का उपयोग नहीं हो पाता।

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बालिकाओं के लिए शौचालय की समस्या

दूसरी ओर, बालिकाओं को परिसर में शौचालय का उपयोग करने में संकोच हो रहा है। इसका कारण है इन शौचालयों की बदहाल स्थिति, जो कि उपयोग के लायक नहीं हैं।

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दिव्यांग शौचालयों की अव्यवस्था

निर्माण तो हुआ, लेकिन सुविधाएं गायब

सरकार ने दिव्यांगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में दिव्यांग शौचालय का निर्माण किया है। लेकिन इन शौचालयों में जरूरी रैंप और रेलिंग की सुविधा नहीं है, जिससे ये शौचालय उपयोग करने लायक नहीं रह गए हैं। कई जगह ये शौचालय कबाड़ की स्थिति में पड़े हुए हैं। अधिकारियों द्वारा कागजों में ही निगरानी दिखाने की बजाय हकीकत में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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शिक्षा व्यवस्था की अव्यवस्था: अधिकारियों की लापरवाही

कारगुजारियों के बजाय सुधार की दिशा में कोई कदम नहीं

केसीजी शिक्षा विभाग हमेशा अपनी कारगुजारियों के लिए जाना जाता है, लेकिन अब शिक्षा व्यवस्था की हालत इससे भी बदतर हो चुकी है। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को लेकर संवेदनशील नहीं दिख रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतरती हुई नजर आ रही है। अधिकारियों का दफ्तरों में बैठकर मानिटरिंग करना, इस स्थिति को सुधरने का तरीका नहीं हो सकता।

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शिक्षकों की स्थिति भी चिंताजनक

ब्लाक के अधिकांश शिक्षक मुख्यालय में नहीं रहते, जिसके कारण भी शिक्षण में वृद्धि नहीं हो पा रही है। जो शिक्षक 60-70 किलोमीटर दूर से स्कूल पहुंचते हैं, उनसे बेहतर शिक्षण की उम्मीद करना मुश्किल है। इसके अलावा, किराए के घरों में रहकर वे आसानी से किराया प्राप्त करते हैं, जबकि स्कूल में समय पर पहुंचने और समय से पहले स्कूल छोड़ने की आदतें आम हो चुकी हैं।

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एसएमसी का केवल औपचारिक गठन

पारंपरिक आयोजन से आगे कुछ नहीं

हर स्कूल में एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) का गठन किया गया है, लेकिन यह कमेटी केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन ही स्कूलों में नजर आती है। इन पदाधिकारियों को बच्चों के भविष्य से कोई सरोकार नहीं है, और विभाग भी शिक्षक-पालक बैठक और शिक्षक संपर्क से दूरी बनाए हुए है। इस कारण से स्कूलों में किसी प्रकार की चर्चा या नवीन पहल की कमी महसूस हो रही है।

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निष्कर्ष: शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता

छुईखदान ब्लाक के स्कूलों में शिक्षा और स्वच्छता की हालत को देखकर यह कहा जा सकता है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए अपनी भूमिका निभानी होगी। तभी हम एक सशक्त और समृद्ध शिक्षा प्रणाली की कल्पना कर सकते हैं।

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In Khairagarh's Chhuikhadan block, the education system is in a deteriorating state, with officials and staff showing negligence towards their duties. Despite government efforts to improve sanitation through the Swachh Bharat Mission, most school toilets remain unusable. Additionally, facilities for differently-abled students are inadequate, with ramps and railings missing. The lack of accountability and oversight by education officers is evident, as they focus more on paperwork than actual improvements. Teachers often commute long distances, impacting the quality of education, while School Management Committees (SMCs) remain largely inactive.


Dinesh Sahu

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