Dindayal Yadu Chhuikhadan.
छुईखदान। चेक अनादरण (चेक बाउंस) के एक मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्ता श्रीमती प्रतिभा साहू, पति अजय साहू को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने उन्हें एक वर्ष के साधारण कारावास एवं 4 लाख 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला 18 अगस्त 2026 को सुनाया गया।
मकान निर्माण के लिए दिए थे 3 लाख रुपये
प्रकरण के अनुसार, परिवादी ने अधूरे मकान के निर्माण के लिए आवश्यक राशि के रूप में 25 अक्टूबर 2021 को अभियुक्ता को 3 लाख रुपये दिए थे। परिवादी के मुताबिक, अभियुक्ता ने यह राशि पांच माह के भीतर वापस करने का आश्वासन दिया था।
निर्धारित समय बीतने के बाद जब परिवादी ने अपनी रकम वापस मांगी, तो अभियुक्ता ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, शाखा छुईखदान का चेक क्रमांक 007618, दिनांक 6 अगस्त 2024, राशि 3 लाख रुपये का चेक अपने हस्ताक्षर से जारी किया।
खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने से हुआ चेक अनादरित
परिवादी द्वारा चेक बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किए जाने पर अभियुक्ता के खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया। इसकी सूचना अभियुक्ता को दिए जाने के बाद भी चेक की राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा।
चेक पर हस्ताक्षर होना निर्विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि प्रस्तुत चेक पर अभियुक्ता के हस्ताक्षर होना निर्विवाद तथ्य है। प्रकरण में यह भी सामने आया कि परिवादी और अभियुक्ता के पति अजय साहू आपस में मित्र थे। इसी मित्रता के चलते दोनों परिवारों के बीच पारिवारिक संबंध बने थे और इसी दौरान मकान निर्माण के लिए 3 लाख रुपये दिए जाने का मामला सामने आया।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के साथ उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों एवं संपूर्ण पत्रावली का परीक्षण किया। इसके बाद अभियुक्ता को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया।
4.50 लाख रुपये परिवादी को प्रतिकर के रूप में मिलेंगे
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि वर्तमान समय में चेक अनादरण के मामलों की बढ़ती संख्या का अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में कानून के प्रावधानों के अनुरूप दंड दिया जाना आवश्यक है।
फैसले के अनुसार, अभियुक्ता को एक वर्ष का साधारण कारावास और 4 लाख 50 हजार रुपये का अर्थदंड भुगतना होगा। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर उन्हें चार माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय ने अभियुक्ता की पूर्व जमानत एवं मुचलका निरस्त करते हुए उन्हें सजा भुगतने के लिए कारागार भेजने का आदेश दिया। साथ ही अर्थदंड की पूरी राशि 4 लाख 50 हजार रुपये परिवादी को प्रतिकर के रूप में प्रदान किए जाने का आदेश भी पारित किया है।


