खैरागढ़। सरकार ने हाई स्कूल भवन बना दिया, नेताओं ने फीता काट दिया, फोटो भी खिंच गई... बस एक छोटी-सी गलती रह गई—बच्चों की पढ़ाई शुरू कराना।
ग्राम पंचायत भरदाकला में करोड़ों रुपये की लागत से बने नए हाई स्कूल भवन का लोकार्पण हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन आज भी भवन में सन्नाटा पसरा है। कारण भी कम दिलचस्प नहीं है—न बिजली है, न शौचालय की समुचित व्यवस्था। यानी भवन पूरी तरह तैयार है, लेकिन पढ़ाई शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं आज भी सरकारी फाइलों में घूम रही हैं।
जिला पंचायत के पूर्व सभापति विप्लव साहू जब निरीक्षण करने पहुंचे तो ग्रामीणों ने बताया कि भवन का उद्घाटन तो धूमधाम से हुआ, लेकिन उसके बाद शायद विभाग भी भूल गया कि यहां बच्चे भी पढ़ने वाले हैं।
विडंबना देखिए, नया भवन खाली खड़ा है और छात्र पुराने मिडिल स्कूल भवन में जगह की कमी के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इधर नया भवन भी देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे खराब होने लगा है। टाइल्स उखड़ने लगी हैं, फिटिंग्स खराब हो रही हैं और करोड़ों की सरकारी संपत्ति धूल फांक रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिक्षा विभाग और बिजली विभाग से गुहार लगाई गई, लेकिन कार्रवाई अब तक 'निर्माणाधीन' ही है।
अब सवाल यह है कि जब स्कूल में बिजली और शौचालय की व्यवस्था ही नहीं थी, तो आखिर लोकार्पण की इतनी जल्दबाजी किस बात की थी? क्या फीता काटना ही विकास है, या फिर बच्चों की पढ़ाई शुरू होना भी किसी योजना का हिस्सा है?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर नए भवन में नियमित कक्षाएं शुरू कराई जाएं, ताकि स्कूल केवल उद्घाटन का स्मारक नहीं, बल्कि शिक्षा का केंद्र बन सके।



