खैरागढ़ जिले के छुईखदान जनपद पंचायत में ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन रोके जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में जनपद पंचायत के सभापति सुधीर गोलछा ने जिला पंचायत के सीईओ को पत्र लिखकर प्रभारी सीईओ श्रीमती केश्वरी देवांगन पर अधिकारों के दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि बिना सक्षम स्वीकृति और स्पष्ट कारण के सचिवों का वेतन रोका जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। सभापति का कहना है कि यह कार्यवाही छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत है। उनके अनुसार किसी अधिकारी को एकतरफा वेतन रोकने का अधिकार नहीं है।
वेतन रुकने से सचिवों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पंचायत स्तर पर विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। कई योजनाओं की गति धीमी पड़ गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर असर दिखाई दे रहा है।
सभापति सुधीर गोलछा ने कहा—
👉 “नियमों को ताक पर रखकर प्रभारी सीईओ द्वारा मनमानीपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं, उच्च अधिकारी भी दबाव में नजर आते हैं।”
वहीं जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल ने बताया कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और प्रभारी सीईओ से 4-5 बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। उन्होंने कहा कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग उठी है। अब सबकी नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही किस हद तक सुनिश्चित की जाती है।


