छुईखदान। जनपद पंचायत छुईखदान में निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने जुलाई माह में जनपद पंचायत छुईखदान के एसडीओ के खिलाफ लिखित शिकायत प्रस्तुत करते हुए निर्माण एवं विकास कार्यों के स्टीमेट और सत्यापन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। शिकायत में कार्यों के सत्यापन के एवज में 2 प्रतिशत कमीशन मांगे जाने, कमीशन नहीं देने पर सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित किए जाने तथा स्टीमेट तैयार करने की प्रक्रिया में कथित मनमानी किए जाने जैसे आरोप शामिल हैं।
हालांकि, शिकायत के बाद अब तक मामले में जांच और कार्रवाई की स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आने से शिकायत की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सरपंचों का कहना है कि शिकायत किए जाने के बाद मामले में क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं मिल पाई है।
2 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप
सरपंचों द्वारा दिए गए शिकायत पत्र में एसडीओ पर निर्माण एवं विकास कार्यों के सत्यापन के एवज में 2 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कमीशन नहीं देने की स्थिति में कार्यों के सत्यापन और संबंधित प्रक्रिया में अड़चन पैदा की जाती है।
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्टीमेट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल
शिकायत में ग्राम पंचायतों के निर्माण एवं विकास कार्यों के स्टीमेट को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सरपंचों का आरोप है कि स्टीमेट तैयार करने की मांग के बावजूद कथित तौर पर स्टीमेट तैयार नहीं किए जाते। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कुछ मामलों में स्टीमेट के लिए मंत्री, सांसद अथवा विधायक के पत्र की आवश्यकता होने जैसी बातें भी कही गईं।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह जांच का विषय होगा कि ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हो रही थी या नहीं।
जुलाई में शिकायत, सितंबर में भी स्थिति स्पष्ट नहीं
सबसे अहम सवाल शिकायत के निराकरण को लेकर है। जुलाई में लिखित शिकायत किए जाने के बाद सितंबर समाप्ति की ओर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शिकायत पर अब तक जांच किस स्तर तक पहुंची है? क्या संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा गया? क्या शिकायतकर्ताओं के बयान लिए गए? संबंधित निर्माण कार्यों की फाइलों, स्टीमेट, एमबी, तकनीकी स्वीकृति और सत्यापन रिकॉर्ड की जांच हुई या नहीं?
यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसके निष्कर्ष क्या हैं और यदि जांच लंबित है तो इसकी वर्तमान स्थिति क्या है—इसकी जानकारी सामने आना जरूरी है।
सीईओ ने कहा- जिला पंचायत को भेजा गया प्रतिवेदन
मामले में जनपद पंचायत छुईखदान की सीईओ केश्वरी देवांगन ने बताया कि सरपंचों की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि शिकायत को लेकर आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्च कार्यालय, जिला पंचायत को प्रतिवेदन भेज दिया गया है।
सीईओ के इस बयान के बाद अब निगाहें जिला पंचायत स्तर पर होने वाली आगामी कार्रवाई पर हैं।
दस्तावेजों की जांच से सामने आएगी वास्तविकता
किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि या खंडन के लिए संबंधित निर्माण कार्यों की फाइलों, स्टीमेट, तकनीकी स्वीकृति, एमबी, सत्यापन रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
साथ ही शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि 2 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप किन परिस्थितियों में लगाया गया और क्या इसके समर्थन में कोई दस्तावेज, रिकॉर्ड या अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं।
अब देखना होगा कि जिला पंचायत स्तर पर इस शिकायत की जांच किस तरह आगे बढ़ती है और आरोपों को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आता है। फिलहाल जुलाई में की गई शिकायत के बाद कार्रवाई की स्थिति को लेकर पारदर्शिता की मांग उठ रही है।


