रायपुर।छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाली पंडवानी की अप्रतिम गायिका तीजन बाई का आज निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही भारतीय लोककला का एक स्वर्णिम अध्याय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। उनकी आवाज़ भले ही अब मौन हो गई हो, लेकिन उनके सुर, उनकी शैली और उनकी विरासत सदियों तक गूंजती रहेगी।
तीजन बाई ने केवल पंडवानी नहीं गाई, बल्कि महाभारत के पात्रों को अपनी आवाज़, अभिनय और अद्भुत प्रस्तुति से मंच पर जीवंत कर दिया। छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा को उन्होंने गांव की चौपाल से उठाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। दुनिया ने उनकी कला में भारत की लोकआत्मा की झलक देखी।
उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और साधना का अद्भुत उदाहरण रहा। सामाजिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर वह मुकाम हासिल किया, जहां पूरा देश उनके नाम पर गर्व करता है।
उनके निधन की खबर से कला, साहित्य, संस्कृति और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। कलाकारों, साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों और हजारों प्रशंसकों ने इसे भारतीय लोकसंस्कृति की अपूरणीय क्षति बताया है।
आज जब पंडवानी की वह बुलंद आवाज़ हमेशा के लिए शांत हो गई है, तब छत्तीसगढ़ की माटी भी मानो अपने सबसे प्रिय स्वर को अंतिम विदाई दे रही है।
"कुछ कलाकार केवल मंच पर नहीं जीते, वे अपनी संस्कृति की आत्मा बन जाते हैं। तीजन बाई ऐसी ही अमर कलाकार थीं।"
भावपूर्ण श्रद्धांजलि।



