खैरागढ़। ग्राम पिपलाकछार में खेत में रोपा लगाने के दौरान करंट लगने से किसान धनसाय पटेल की मौत और दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि खेत में बिजली का तार करीब दो महीने पहले टूट गया था। इसकी शिकायत पांडादाह वितरण केंद्र में कई बार की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते सुधार कार्य करना जरूरी नहीं समझा। नतीजा यह हुआ कि एक किसान की जान चली गई और दो लोग अस्पताल पहुंच गए।
अब सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग शिकायतों पर कार्रवाई केवल किसी की मौत के बाद ही करता है? यदि ग्रामीणों के दावे सही हैं और लिखित शिकायत के बावजूद टूटे तार की मरम्मत नहीं हुई, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने का मामला भी माना जाएगा।
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विडंबना यह है कि हर साल करंट से लोगों की मौत की खबरें सामने आती हैं, लेकिन विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं। हादसा होने के बाद जांच, आश्वासन और कार्रवाई की बातें शुरू हो जाती हैं, लेकिन सवाल वही रहता है—अगर समय पर तार ठीक कर दिया जाता, तो क्या धनसाय पटेल आज जीवित होते?
अब पूरे मामले की जांच की बात कही जा रही है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें सिर्फ जांच नहीं, बल्कि दोषियों पर ठोस कार्रवाई चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
बड़ा सवाल: आखिर शिकायतों का समाधान पहले होगा या हर बार किसी की जान जाने का इंतजार किया जाएगा?



