खैरागढ़।कहते हैं भारत में कुछ भी परमानेंट नहीं होता… लेकिन खैरागढ़-छुईखदान सड़क ने इस कहावत को नए स्तर पर पहुँचा दिया है। यहां सड़क नहीं, गड्ढे परमानेंट होते जा रहे हैं — और यही शायद “विकास मॉडल” का असली फंडा है।
दरअसल, अगर सड़क एक बार में बढ़िया बन जाए और सालों चले… तो ठेकेदार क्या करेंगे? अधिकारी किस बात की फाइल घुमाएंगे? और मजदूरों को बार-बार काम कहां से मिलेगा?
यानी साफ है — सड़क का खराब रहना ही सिस्टम का असली “रोजगार गारंटी योजना” है!
### ₹5.90 करोड़ की सड़क, लेकिन सफर गड्ढों का
खैरागढ़ 46 से छुईखदान 62 मील पत्थर तक करीब 15.5 किलोमीटर सड़क के नवीनीकरण के लिए ₹5 करोड़ 90 लाख 45 हजार की मोटी रकम स्वीकृत हुई।
काम लोक निर्माण विभाग के माध्यम से होना था, 2021 में वर्क ऑर्डर, 2024 तक पूरा करने की डेडलाइन, और ऊपर से 2029 तक परफॉर्मेंस गारंटी (PG) भी लागू।
कागजों में तो सड़क “VIP ट्रीटमेंट” पा रही है…
लेकिन जमीन पर हालत — “गड्ढों का रेड कार्पेट”!
### मेंटेनेंस या मैनेजमेंट?
सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार संजय सिंघी के नाम से एग्रीमेंट हुआ है।
अब दिलचस्प बात ये है कि जहां-जहां इनका काम होता है, वहां गुणवत्ता अक्सर “लापता” हो जाती है — जैसे सड़क में डामर।
सवाल ये नहीं कि सड़क खराब क्यों है…
सवाल ये है कि परफॉर्मेंस गारंटी में परफॉर्मेंस आखिर है कहां?
### गड्ढों में विकास, हादसों में संभावनाएं
खैरागढ़ ढिमरीन कुआं से छुईखदान तक सड़क महीनों से खराब है।
रोजाना हजारों वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन सड़क ऐसी कि ड्राइविंग कम, “एडवेंचर स्पोर्ट्स” ज्यादा लगता है।
* कहीं गड्ढा, कहीं धूल
* कहीं उखड़ी सड़क, कहीं पानी भरा जाल
* और ऊपर से मेंटेनेंस का नामोनिशान नहीं
लगता है “परफॉर्मेंस गारंटी” का मतलब अब ये हो गया है कि
👉 “गड्ढे परफॉर्म करेंगे, सड़क नहीं!”
### सिस्टम पर सवाल या सेटिंग का कमाल?
जब बार-बार शिकायत के बाद भी सड़क की मरम्मत नहीं होती,
और वही ठेकेदार लगातार टेंडर पाता है…
तो आम जनता के मन में सवाल उठना लाजिमी है—
👉 क्या ठेकेदार को प्रशासन का डर नहीं?
👉 या फिर सब कुछ “सेटिंग” के भरोसे चल रहा है?
### आखिर PG में हो क्या रहा है?
पांच साल की परफॉर्मेंस गारंटी है…
तो फिर:
* सड़क क्यों टूट रही है?
* मरम्मत क्यों नहीं हो रही?
* जिम्मेदार कौन है?
या फिर PG का असली मतलब यही है कि
“पैसा गया, गड्ढा आया!”
### निष्कर्ष: सड़क नहीं, सिस्टम सुधारिए
खैरागढ़ से छुईखदान तक यह सड़क सिर्फ एक रास्ता नहीं,
बल्कि व्यवस्था की पोल खोलती तस्वीर बन चुकी है।
जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी,
तब तक सड़कें नहीं, सिर्फ गड्ढे ही “परमानेंट” रहेंगे।


