खैरागढ़। नगर में शनिवार का दिन उस समय बेहद भावुक हो गया, जब लाल चिंता हरण सिंह के पुत्र स्व. राजेन्द्र सिंह का निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों के साथ नगर तथा आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग उनके निवास पहुंचे और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।
दोपहर बाद जब स्व. राजेन्द्र सिंह की अंतिम यात्रा निकली तो माहौल गमगीन हो गया। नगर के प्रमुख मार्गों से होकर अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंची। इस दौरान परिजनों और रिश्तेदारों के साथ सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े सैकड़ों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।
लेकिन श्मशान घाट पर वह पल हर किसी की आंखें नम कर गया, जब स्व. राजेन्द्र सिंह की बड़ी पुत्री आराध्या सिंह ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। जिस पिता ने बेटी को जीवनभर स्नेह और संस्कार दिए, उसी पिता को अंतिम विदाई देने की जिम्मेदारी बेटी ने अपने हाथों से निभाई।
मुखाग्नि देते समय वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। कुछ पल के लिए पूरा वातावरण जैसे शांत हो गया। हर किसी के मन में पिता और बेटी के रिश्ते की भावुक तस्वीर दिखाई दे रही थी। परंपराओं से अलग इस जिम्मेदारी को बेटी ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ निभाया, उसने उपस्थित लोगों को भीतर तक भावुक कर दिया।
वह दृश्य केवल एक अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि एक बेटी के साहस, पिता के प्रति उसके प्रेम और दोनों के अटूट रिश्ते की मार्मिक तस्वीर बन गया। वहां मौजूद कई बुजुर्गों ने कहा कि उन्होंने वर्षों बाद ऐसा दृश्य देखा है, जिसने उनके दिल को गहराई तक छू लिया।
अंतिम संस्कार में नगर के पार्षद, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी शामिल हुए। सभी ने स्व. राजेन्द्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोकाकुल परिवार को इस कठिन घड़ी में संबल प्रदान करने की कामना की।
स्व. राजेन्द्र सिंह के निधन पर परिवार को सांत्वना देने वालों का सिलसिला पूरे दिन जारी रहा। नगर के कई प्रतिष्ठित नागरिकों ने भी उनके निवास पहुंचकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
एक पिता की अंतिम विदाई… एक बेटी का साहस… और आंखों में छलकता पूरा शहर का दर्द—खैरागढ़ ने स्व. राजेन्द्र सिंह को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।



