खैरागढ़ में ‘टेलीफोनिक शिक्षा मॉडल’ हिट! संकुल समन्वयक बोले – स्कूल जाएं क्यों, फोन है ना…
खैरागढ़। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है, लेकिन इस बार मामला थोड़ा “आधुनिक” है। अब खैरागढ़ ब्लॉक में पढ़ाई-लिखाई का नया मॉडल सामने आया है—**“टेलीफोनिक सुपरविजन”**।
सूत्र बताते हैं कि संकुल समन्वयक अब स्कूल जाकर धूल फांकने के बजाय, मोबाइल पर ही शिक्षा व्यवस्था को कंट्रोल कर रहे हैं। गाइडलाइन चाहे कुछ भी कहे—कि पहले अपने मूल स्कूल में बच्चों को पढ़ाओ और फिर संकुल के स्कूलों का निरीक्षण करो—लेकिन यहां तो लगता है गाइडलाइन भी छुट्टी पर है।
### 📞 फोन उठाओ, सुपरविजन कर जाओ!
खैरागढ़ ब्लॉक में कई संकुल समन्वयक ऐसे “राज” कर रहे हैं, मानो स्कूल जाना उनकी ड्यूटी में शामिल ही नहीं है।
* बच्चों को पढ़ाना? ❌
* स्कूल का निरीक्षण? ❌
* फोन पर हालचाल पूछ लेना? ✅
यानि “हैलो मास्टर जी, सब ठीक है ना?” — और हो गया सुपरविजन पूरा!
### 🏫 मूल स्कूल भी ‘मूल समस्या’ बन गया
स्थिति यह है कि कई समन्वयक अपने मूल स्कूल तक नहीं पहुंच रहे।
कुछ “रिपोर्टिंग” के नाम पर गायब हैं, तो कुछ सीधे बीईओ ऑफिस में ही स्थायी निवास बना चुके हैं।
अगर कभी डेली डायरी की सरप्राइज चेकिंग हो जाए, तो कई “शिक्षा योद्धाओं” की असल कहानी बाहर आ सकती है—लेकिन शायद यह रिस्क कोई लेना नहीं चाहता।
### 🚨 छुईखदान में जागा विभाग, नोटिस की बरसात
इधर छुईखदान ब्लॉक में मामला थोड़ा अलग है। वहां विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने समन्वयकों की लगातार गैरहाजिरी पर सख्त रुख अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
अब समन्वयकों को जवाब देना होगा—वरना कार्रवाई तय मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार:
* कई विद्यालयों में समन्वयक नियमित नहीं पहुंच रहे
* निरीक्षण के अभाव में पढ़ाई प्रभावित हो रही
* एक समन्वयक तो लंबे समय से ऑफिस में ही “फील्ड वर्क” कर रहा है
### 👨👩👧 अभिभावकों का दर्द: “बच्चे पढ़ें कैसे?”
ग्रामीण अभिभावकों का कहना है कि:
* शिकायत के बाद भी सुधार नहीं हो रहा
* स्कूलों में अनुशासन कमजोर हो गया है
* शिक्षक और पढ़ाई दोनों प्रभावित हैं
उनकी मांग साफ है—**समन्वयकों की जिम्मेदारी तय हो और फील्ड विजिट अनिवार्य की जाए।**
### ⚖️ अब होगी जांच या फिर ‘फोन से ही’ निपट जाएगा मामला?
बीईओ द्वारा नोटिस जारी होने के बाद विभाग में हलचल जरूर है।
बताया जा रहा है कि अब उपस्थिति रजिस्टर और निरीक्षण रिकॉर्ड की जांच की तैयारी हो रही है।
अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिले, तो कार्रवाई भी हो सकती है…
लेकिन बड़ा सवाल वही है—
👉 क्या यह जांच भी “टेलीफोनिक” ही होगी?
### 🟡 DNnews व्यंग्य निष्कर्ष
खैरागढ़ में शिक्षा व्यवस्था अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है—
जहां स्कूल जाने की जरूरत नहीं,
फोन ही नया ब्लैकबोर्ड बन गया है!
अब देखना यह है कि प्रशासन इस “डिजिटल चमत्कार” को रोकता है या इसे नई नीति बना देता है।


