🔴 KHAIRAGARH बस स्टैंड यात्री प्रतीक्षालय बदहाल,
DNnews की खबर के बाद कांग्रेस ने लिया व्यवस्था का जायजा,पालिका पर लापरवाही के आरोप
खैरागढ़। जिला मुख्यालय के एकमात्र बस स्टैंड स्थित यात्री प्रतीक्षालय की जर्जर और बदहाल स्थिति को लेकर रविवार 22 फरवरी को शहर कांग्रेस कमेटी ने आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परिसर में भारी गंदगी, शराब की खाली बोतलें, पानी के पाउच, गांजा सेवन की सामग्री और मवेशियों का डेरा देखकर कांग्रेस नेताओं ने नगर पालिका प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अरुण भारद्वाज के नेतृत्व में पहुंची टीम ने पाया कि प्रतीक्षालय में नियमित सफाई का पूर्ण अभाव है। कमरों के भीतर और बाहर दर्जनों खाली शराब की बोतलें बिखरी पड़ी थीं। कई स्थानों पर गोबर और कचरे का ढेर नजर आया। यात्रियों के बैठने के लिए लगी कुर्सियां टूटी हुई हैं, जबकि पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने मौके पर नगर पालिका के स्वच्छता प्रभारी को बुलाकर स्थिति से अवगत कराया और तीन दिनों के भीतर सुधार नहीं होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी। उनका कहना था कि यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के उद्देश्य से बनाए गए प्रतीक्षालय का इस तरह उपेक्षित रहना प्रशासनिक उदासीनता का प्रमाण है।
डॉ. भारद्वाज ने आरोप लगाया कि नगर पालिका शहर के बुनियादी ढांचे के रखरखाव में असफल रही है। विधायक प्रतिनिधि मनराखन देवांगन ने भी नगर पालिका और पुलिस प्रशासन पर मौन सहमति का आरोप लगाते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थल पर खुलेआम शराब और नशाखोरी होना गंभीर चिंता का विषय है, जिससे शहर का सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। निरीक्षण के दौरान पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा।
कांग्रेस कमेटी ने नगर पालिका कार्यालय से पैदल मार्च करते हुए बस स्टैंड पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। निरीक्षण के दौरान नेता प्रतिपक्ष दीपक देवांगन, यतेंद्रजित सिंह, पुरन सारथी, शेखर दास वैष्णव, भरत चंद्राकर, सूर्यकांत यादव, नदीम मेमन, मोहित भांडेकर, महेश यादव, मनोहर सेन, रानू खान, रघुनाथ यादव और सिद्धांत सिंह मौजूद रहे।
📰 DNnews ने पहले भी उठाया था मुद्दा
उक्त मामले को DNnews ने प्रमुखता से उठाया था। खबर सामने आने के बाद पालिका प्रशासन ने प्रतीक्षालय में केवल चार पंखे और चार ट्यूबलाइट लगाकर औपचारिकता निभाई। लेकिन यात्रियों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था, नियमित साफ-सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं पर अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पालिका ऐसे मामलों में पूरी तरह सुस्त दिखाई देती है। गौरतलब है कि खैरागढ़ अपनी सांस्कृतिक पहचान के कारण देश-विदेश में जाना-पहचाना शहर है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की ऐसी स्थिति शहर की छवि को प्रभावित कर रही है।
अब देखना यह होगा कि तीन दिन की चेतावनी के बाद नगर पालिका प्रशासन सुधारात्मक कदम उठाता है या मामला आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ता है।


