शिकायतों के बोझ तले दबा खनिज विभाग, कार्रवाई अब भी “खोदाई” में!
खैरागढ़। जिले में अवैध ईंट भट्ठों, रेत परिवहन और मुरुम खोदाई की शिकायतें जिस रफ्तार से बढ़ रही हैं, उसे देखकर ऐसा लगने लगा है कि खनिज विभाग अब केवल बोर्ड और दफ्तर तक सीमित होकर रह गया है। जमीन पर विभाग की मौजूदगी उतनी ही दिखाई देती है, जितनी गर्मी में तालाब का पानी।
हाल ही में जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष गुलशन तिवारी ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई की मांग की। मामला ग्राम पंचायत खैरी-मुरई चौक का है, जहां मनरेगा से बने शासकीय तालाब को पाटकर ईंट भट्ठा संचालित होने का आरोप लगाया गया। शिकायत में जल संकट और शासकीय संपत्ति को नुकसान की बात कही गई, लेकिन खनिज विभाग की सक्रियता अब भी “जांच जारी है” के पुराने फार्मूले से आगे नहीं बढ़ पाई है।
जिला बनने के बाद विकास की उम्मीद थी, लेकिन अवैध कारोबारियों के लिए यह मानो “स्वर्णकाल” साबित हो गया। अवैध ईंट भट्ठे, बिना रॉयल्टी रेत परिवहन और खुलेआम मुरुम खोदाई की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। मीडिया खबरें चला रहा है, लोग शिकायतें कर रहे हैं, ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन विभागीय कार्रवाई शायद छुट्टी पर चल रही है।
लोग अब सवाल पूछने लगे हैं कि आखिर डर किस बात का है? क्या विभाग अवैध कारोबारियों से इतना प्रभावित है कि कार्रवाई करने से पहले अनुमति लेनी पड़ती है? या फिर विभाग ने यह मान लिया है कि शिकायतें सिर्फ फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए होती हैं।
व्यंग्य यही है कि जिले में अवैध कारोबार तेजी से “खनिज संपदा” बनते जा रहे हैं, और खनिज विभाग अब भी कागजों में “स्थिति नियंत्रण में है” लिखकर खुद को संतुष्ट कर रहा है।


