राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में एग्रीस्टैक पंजीयन को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर किसानों को परेशान करने और धान खरीदी की जिम्मेदारी से बचने के लिए लगातार नए नियम लागू करने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रूपेश दुबे ने कहा कि सरकार अब एग्रीस्टैक पंजीयन के नाम पर किसान परिवारों को आपस में बांटने और बंटवारे की स्थिति पैदा करने की साजिश कर रही है, जो किसानों के साथ क्रूरता का प्रमाण है।
रूपेश दुबे ने कहा कि एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन के लिए सामिलात खाते में दर्ज किसान परिवार के सभी सदस्यों का पंजीयन अनिवार्य किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब तक एग्रीस्टैक पंजीयन पोर्टल के सर्वर की तकनीकी समस्या दूर नहीं कर सकी है। इसके कारण किसानों को पंजीयन के लिए लगातार परेशान होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सामिलात खाते में शामिल परिवार के कई सदस्य विवाह के बाद दूसरे जिले या प्रदेश में निवास करते हैं, जबकि कुछ लोग रोजगार के सिलसिले में बाहर रहते हैं। ऐसे लोगों को केवल पंजीयन कराने के लिए अपने काम और परिवार को छोड़कर वापस गांव आना पड़ रहा है। सर्वर डाउन रहने की स्थिति में उन्हें दो से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनके रोजगार और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के कारण कई किसान परिवारों में विघटन, आपसी दरार और बंटवारे जैसी परिस्थितियां पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के बजाय ऐसी जटिल प्रक्रियाएं लागू करना सरकार की किसान विरोधी नीति को दर्शाता है।
दुबे ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में किसानों को धान खरीदी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने टोकन व्यवस्था, एग्रीस्टैक पंजीयन, बारदाने की समस्या, रकबा समर्पण, किसानों के घरों में छापे, खरीदी गई धान के उठाव में देरी, धान में चूहों से नुकसान और सूखत जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए सरकार पर किसानों को लगातार परेशान करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के लिए पंजीयन प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए और तकनीकी खामियों को तत्काल दूर करना चाहिए, ताकि बाहर रहने वाले परिवार के सदस्यों को केवल पंजीयन के लिए अपने काम और परिवार से दूर न होना पड़े। साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि किसान परिवारों पर अनावश्यक नियम थोपने के बजाय सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी व्यवस्था लागू की जाए।



