खैरागढ़। शहर में शराब दुकानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शराब खरीदने आने वाले ग्राहकों के साथ कथित मारपीट, जेबकटने और लूटपाट की आशंकाओं के बीच बीती रात चाकूबाजी की घटना सामने आने से क्षेत्र में चिंता का माहौल है। आरोप है कि शराब दुकान के आसपास असामाजिक तत्वों के समूह सक्रिय रहते हैं और अंधेरे का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बनाते हैं। यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है, तो यह पुलिस की गश्त और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था, दोनों के लिए गंभीर चुनौती है।
रात करीब साढ़े नौ बजे बाइक सवारों पर हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीती रात करीब साढ़े नौ बजे मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्ति शराब दुकान से लौट रहे थे। इसी दौरान करीब आठ से दस लोगों के एक समूह द्वारा उन्हें घेरने और कथित तौर पर लूटपाट की नीयत से हमला करने की बात सामने आई है। घटना के दौरान चाकू से हमला किए जाने की भी जानकारी मिली है, जिसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
घायल को खून से लथपथ हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी बताया जा रहा है। घटना के बाद शराब दुकान के आसपास आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, घटना की परिस्थितियों, हमलावरों की संख्या, हमले के उद्देश्य और आरोपियों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच से ही स्पष्ट होगी।
शराब बिक्री से राजस्व, लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
शराब दुकानों से सरकार को राजस्व मिलता है, लेकिन दुकान के आसपास ग्राहकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर यह शिकायत सामने आती रही है कि शराब दुकानों के आसपास संदिग्ध लोगों का जमावड़ा रहता है। जेब काटने, पैसे छीनने और ग्राहकों से विवाद की आशंकाओं के चलते लोग परेशान होते हैं।
यदि ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। आबकारी विभाग का दायित्व शराब दुकानों के संचालन और निर्धारित नियमों के पालन की निगरानी करना है, जबकि अपराधों की रोकथाम, आरोपियों की धरपकड़ और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस की है। दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
सीसीटीवी और रोशनी की व्यवस्था पर भी उठे सवाल
शराब दुकानों के आसपास पर्याप्त रोशनी और प्रभावी सीसीटीवी निगरानी नहीं होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अंधेरे वाले स्थानों पर निगरानी की कमी होने से अपराध की घटनाओं की जांच में कठिनाई हो सकती है।
ऐसे में संबंधित शराब दुकानों और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की जांच, उनकी नियमित निगरानी तथा खराब कैमरों को दुरुस्त कराने की जरूरत है। साथ ही पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और जरूरत पड़ने पर जांच में मदद मिल सके।
सुपरविजन और गश्त के दावों की होनी चाहिए समीक्षा
शराब दुकानों के संचालन की निगरानी के लिए विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि निरीक्षण और सुपरविजन के दौरान दुकानों के आसपास की सुरक्षा संबंधी समस्याओं पर कितना ध्यान दिया जाता है।
यदि स्थानीय लोगों की शिकायतों के बावजूद असामाजिक गतिविधियां जारी हैं, तो आबकारी विभाग को अपने निरीक्षण की व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। वहीं, पुलिस को संवेदनशील दुकानों के आसपास नियमित गश्त बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई करने और शिकायतकर्ताओं को भरोसा दिलाने की जरूरत है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार छोटी-मोटी घटनाओं में बदनामी या अनावश्यक परेशानी के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती। ऐसी स्थिति में पुलिस को शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सरल बनाने और लोगों को आगे आकर सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
ग्राहकों से विवाद की शिकायतों पर भी हो कार्रवाई
शराब दुकानों के आसपास केवल बाहरी असामाजिक तत्वों की गतिविधियां ही नहीं, बल्कि ग्राहकों और दुकान कर्मचारियों के बीच विवाद की शिकायतों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। किसी भी विवाद की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार या अनावश्यक झगड़े की शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण हो सके।
अब आबकारी विभाग और पुलिस से जवाब की उम्मीद
खैरागढ़ में शराब दुकान के आसपास हुई कथित चाकूबाजी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या संबंधित क्षेत्र में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे और रोशनी की व्यवस्था है? क्या पुलिस नियमित गश्त कर रही है? क्या आबकारी विभाग ने दुकानों के आसपास की समस्याओं पर कोई निरीक्षण या कार्रवाई की है? इन सवालों पर संबंधित विभागों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
सरकार को राजस्व देने वाली शराब दुकानों के आसपास यदि ग्राहक ही सुरक्षित महसूस नहीं करते, तो व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। शराब की बिक्री और राजस्व संग्रह के साथ-साथ नियमानुसार निगरानी, अपराधों की रोकथाम और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी संबंधित विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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