खैरागढ़। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG) जिले में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन इसके बावजूद कई इलाकों में शराब कोचियों के हौसले कम होते नजर नहीं आ रहे हैं। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से लगातार अवैध शराब के मामले सामने आना इस बात का संकेत है कि शराब की अवैध बिक्री और तस्करी पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है।
हाल ही में गातापार पुलिस की कार्रवाई में मध्यप्रदेश निर्मित 25 पेटी गोवा व्हिस्की के साथ बोलेरो वाहन पकड़े जाने का मामला सामने आया। खास बात यह रही कि शराब तस्करी में इस्तेमाल बोलेरो को कथित तौर पर पुलिस वाहन जैसा रूप दिया गया था, ताकि किसी को वाहन पर संदेह न हो। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर दो आरोपियों को पकड़ा।
पुलिस के मुताबिक, जब्त शराब की कीमत करीब 1.50 लाख रुपये है, जबकि बोलेरो और अन्य सामान सहित कुल जब्ती करीब 6.62 लाख रुपये की बताई गई है। मामले में अंकित कुमार नामदेव और शुभम सरकार, दोनों निवासी कोंडागांव, को गिरफ्तार किया गया है।
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कार्रवाई हो रही, फिर भी कोचियों पर पूरी तरह नहीं लगाम
जिले में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार सामने आ रही है। इसके बावजूद शहर से लेकर कुछ बड़े बाजारों और आवागमन वाले क्षेत्रों में शराब कोचियों के सक्रिय होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कुछ स्थानों पर शराब महंगे दामों में बेची जा रही है।
हालांकि, जहां नई शराब दुकानें शुरू हुई हैं, वहां अवैध बिक्री में कमी आने की बात सामने आती है, लेकिन जिले के कुछ बड़े जंक्शनों और ग्रामीण इलाकों में अब भी अवैध शराब की बिक्री को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
तस्करी के नए तरीके ने बढ़ाई चिंता
बोलेरो को पुलिस वाहन जैसा रूप देकर शराब की तस्करी किए जाने का मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि शराब तस्कर अब पुलिस की नजर से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में केवल शराब पकड़ने की कार्रवाई के बजाय शराब के अवैध नेटवर्क, सप्लायर और स्थानीय स्तर पर बिक्री करने वालों तक पहुंचना भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है।
पुलिस कार्रवाई के बाद भी सवाल बरकरार
एक तरफ पुलिस लगातार अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अलग-अलग इलाकों से सामने आ रहे मामले यह सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर शराब की अवैध सप्लाई जिले में पहुंच कैसे रही है और स्थानीय स्तर पर इसे बेचने वाले कौन हैं?
पुलिस की कार्रवाई से निश्चित तौर पर तस्करों पर दबाव बना है, लेकिन अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सप्लाई चेन से लेकर स्थानीय कोचियों तक प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। अब देखना होगा कि पुलिस आने वाले दिनों में इस नेटवर्क पर कितनी सख्ती से शिकंजा कसती है।



