Dinesh Sahu Khairagarh 9098981250
खैरागढ़। आज इंसान के पास पहले से कहीं अधिक सुविधाएं हैं। तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, मोबाइल ने दुनिया को हाथों में ला दिया है और आधुनिक जीवन ने सुख-सुविधाओं के नए रास्ते खोल दिए हैं। बावजूद इसके मनुष्य का मन अशांत है। परिवारों में बढ़ता बिखराव, रिश्तों में दूरी और आपसी टकराव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सुख की तलाश में इंसान बहुत कुछ पा तो रहा है, लेकिन सुकून कहीं पीछे छूटता जा रहा है।
इन्हीं सामाजिक परिस्थितियों को समझने और परिवारों में संस्कार, संवाद तथा आपसी जुड़ाव को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश साहू संघ छत्तीसगढ़ के निर्देशन में जिला साहू संघ खैरागढ़-छुईखदान-गंडई द्वारा परिवार संस्कार पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सोनेसरार, खैरागढ़ स्थित साहू धर्मशाला में किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ समाज की अधिष्ठात्री देवी मां कर्मा के तैलचित्र पर पूजा-अर्चना कर किया गया। कार्यक्रम में जिलेभर से साहू समाज के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रबुद्धजनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ के प्रबोधक प्रशिक्षक पूनम साहू एवं बसंत साहू ने ‘परिवार संस्कार’ कार्यक्रम ‘समाज परिवार की ओर’ के तहत मानवीय शिक्षा शोध केंद्र एवं अभ्युदय संस्थान, अछोटी-अहिवारा के माध्यम से परिवार और समाज से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
सुख चाहिए, लेकिन रास्ता कौन सा है?
कार्यशाला में वर्तमान समय के सबसे बड़े सामाजिक सवालों पर गंभीरता से विचार किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज व्यक्ति काम में इतना व्यस्त हो गया है कि परिवार के लिए समय कम पड़ रहा है। मोबाइल और डिजिटल दुनिया ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं कई मामलों में परिवार के सदस्यों के बीच संवाद भी कम किया है।
भाई-भाई में टकराव, पति-पत्नी के बीच विवाद, सास-बहू के रिश्तों में तनाव और रिश्तेदारों के बीच बढ़ती दूरी आज परिवारों की बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
वक्ताओं ने कहा कि पहले की तुलना में जीवन में सुविधाएं कई गुना बढ़ गई हैं, लेकिन मानसिक संतोष उसी अनुपात में नहीं बढ़ा। इंसान सुख पाने के लिए धन, प्रतिष्ठा, सुविधा और आधुनिक साधनों के पीछे भाग रहा है, लेकिन वास्तविक सुख और शांति के लिए उसे अपने ही परिवार और रिश्तों की ओर लौटने की जरूरत है।
प्रकृति से छेड़छाड़ नहीं, व्यवस्था को समझना जरूरी
प्रबोधक प्रशिक्षक पूनम साहू ने मानव सभ्यता के विकासक्रम को जंगल युग से धातु युग, कबीला युग और विद्युत युग तक विस्तार से समझाया। उन्होंने मानव की मूल चाहत पर चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य मूल रूप से सुखपूर्वक जीना चाहता है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति में एक निश्चित व्यवस्था है और मानव को उस व्यवस्था के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। आधुनिक विकास के साथ यदि मानवीय मूल्यों, प्रकृति और पारिवारिक रिश्तों की उपेक्षा होती है तो सुविधाएं बढ़ने के बावजूद जीवन में संतोष कम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है। सम्मान किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के हाथ में मौजूद एक कटोरा है—जरूरत केवल एक-दूसरे की पहचान और सम्मान करने की है।
परिवार मजबूत होगा तो समाज मजबूत होगा
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि समाज को मजबूत बनाने की शुरुआत परिवार से ही होती है। यदि परिवार में संवाद, सम्मान, विश्वास और संस्कार मजबूत होंगे तो समाज भी मजबूत होगा।
वक्ताओं ने कहा कि परिवारों में बढ़ते बिखराव को समय रहते रोकना जरूरी है। समाज के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने के लिए इस तरह के प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम में प्रदेश साहू संघ के कार्यकारिणी सदस्य मदन साहू, जिला साहू संघ अध्यक्ष टीलेश्वर साहू, संरक्षक भुनेश्वर साहू, बिशेसर साहू, महामंत्री नूनकरण साहू सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
आज जब इंसान सुख की तलाश में कभी पैसे, कभी सुविधाओं, कभी तकनीक और कभी सफलता के पीछे भाग रहा है, ऐसे समय में यह कार्यशाला एक जरूरी सवाल छोड़ती है—आखिर जिस सुख के लिए हम पूरी जिंदगी भटक रहे हैं, क्या वह हमारे अपने परिवार, रिश्तों, सम्मान और आपसी अपनापन में ही छिपा हुआ है?




