खैरागढ़। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) पुलिस ने आयुष्मान कार्ड अपडेट कराने के नाम पर ग्रामीणों से कथित रूप से धोखाधड़ी और अवैध वसूली करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त कंप्यूटर सेट और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार, थाना खैरागढ़ में दर्ज अपराध क्रमांक 282/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) एवं 3(5) के अंतर्गत मामले की जांच की गई। विवेचना के दौरान सामने आया कि आरोपी स्वयं को कलेक्टर कार्यालय का अधिकारी बताकर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचते थे और आयुष्मान कार्ड अपडेट कराने का झांसा देकर प्रत्येक व्यक्ति से 50 रुपये वसूलते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि ग्रामीणों से पैसे लेने के बावजूद उनके आयुष्मान कार्ड अपडेट नहीं किए गए। पुलिस का आरोप है कि सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर भोले-भाले लोगों को गुमराह कर उनसे अवैध रूप से राशि वसूली गई।
तीनों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है—
शम्मी सिंह ठाकुर उर्फ मोनू सिंह ठाकुर (35 वर्ष), निवासी भिलाई
शुभलायक सिंह ठाकुर (35 वर्ष), निवासी पटेवा, जिला राजनांदगांव
गोपी निषाद (35 वर्ष), निवासी पुलगांव, जिला दुर्ग
पूछताछ के दौरान आरोपियों के मेमोरेंडम के आधार पर घटना में प्रयुक्त कंप्यूटर सेट एवं मोबाइल फोन बरामद कर जब्त किए गए।
अन्य क्षेत्रों में भी जांच जारी
पुलिस का कहना है कि यह जांच की जा रही है कि आरोपियों ने जिले के अन्य क्षेत्रों या अन्य जिलों में भी इसी तरह लोगों को निशाना बनाया है या नहीं। मामले की विवेचना जारी है।
पुलिस ने लोगों से की अपील
खैरागढ़ पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी शासकीय योजना के नाम पर धनराशि मांगने वाले या स्वयं को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। किसी भी सरकारी योजना का लाभ केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्राप्त करें। यदि कोई व्यक्ति योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे की मांग करता है, तो इसकी सूचना तत्काल निकटतम थाना या पुलिस कंट्रोल रूम को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।
नोट: यह समाचार पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है और न्यायालय में दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानूनन आरोपी माने जाते हैं।


